कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दोनों चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। अब पूरे देश की नजर 4 मई को आने वाले चुनावी नतीजों पर टिकी हुई है। हालांकि इस बार चुनावी प्रक्रिया के दौरान हिंसा की घटनाएं पहले के मुकाबले कम रहीं, लेकिन कुछ संवेदनशील इलाकों में तनाव और झड़पों ने एक बार फिर बंगाल की चुनावी हिंसा के इतिहास को चर्चा में ला दिया है।
दूसरे चरण में बढ़ा तनाव, कई बूथों पर दोबारा मतदान
23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग के दौरान आधिकारिक तौर पर किसी बड़ी हिंसा की पुष्टि नहीं हुई थी। वहीं 29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण में डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम के कुछ बूथों पर हंगामा, झड़प और सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज तक करना पड़ा।
स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने 15 बूथों पर 2 मई को दोबारा मतदान कराया। वहीं फालता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 बूथों पर 21 मई को फिर से वोटिंग कराने का फैसला लिया गया है। इन बूथों की मतगणना 24 मई को होगी।
अमित शाह ने बताया “सबसे शांतिपूर्ण चुनाव”
पहले चरण की वोटिंग के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि यह पश्चिम बंगाल के इतिहास का सबसे शांतिपूर्ण चुनाव रहा। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद बंगाल में चुनाव के दौरान किसी की मौत नहीं हुई, जो अपने आप में बड़ा बदलाव है।
शाह ने चुनाव आयोग, CAPF और बंगाल पुलिस की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जनता ने भारी उत्साह के साथ परिवर्तन के लिए मतदान किया है।
बंगाल में क्यों चर्चा में रहती है चुनावी हिंसा?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि देश में राजनीतिक हिंसा और हत्याओं के मामलों में पश्चिम बंगाल लंबे समय से सबसे ऊपर रहा है। चुनावी दौर में यह हिंसा और ज्यादा बढ़ जाती है।
2024 लोकसभा चुनाव
2024 के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय बलों की 900 से अधिक कंपनियां तैनात की गई थीं। इसके बावजूद 6 से 10 लोगों की मौत और 100 से ज्यादा हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं।
2023 पंचायत चुनाव
2023 के पंचायत चुनाव को बंगाल के सबसे हिंसक चुनावों में गिना जाता है। नामांकन से लेकर मतगणना तक हिंसा जारी रही और 45 से 55 लोगों की मौत की खबरें सामने आईं।
2021 विधानसभा चुनाव
2021 में TMC की जीत के बाद बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक 1300 से ज्यादा हिंसक घटनाएं हुईं और 17 लोगों की मौत दर्ज की गई।
2019 लोकसभा चुनाव
बीजेपी के उभार वाले इस चुनाव में 12 से 15 लोगों की मौत और 700 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई थीं।
2018 पंचायत चुनाव
2018 पंचायत चुनाव को पिछले दो दशकों का सबसे हिंसक चुनाव माना जाता है। इसमें करीब 75 लोगों की मौत हुई थी और कई बूथों पर कब्जे की घटनाएं सामने आई थीं।
रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
इस बार बंगाल में रिकॉर्ड मतदान हुआ है। भारी वोटिंग प्रतिशत ने राजनीतिक दलों की चिंता और उत्सुकता दोनों बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण और शहरी वोटिंग पैटर्न इस बार नतीजों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
मतगणना से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
मतगणना से पहले राज्यभर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। स्ट्रॉन्ग रूम और काउंटिंग सेंटरों की निगरानी ड्रोन और CCTV कैमरों से की जा रही है।
अब सबकी नजर आज 4 मई पर है, जब यह तय होगा कि बंगाल में ममता बनर्जी की सत्ता बरकरार रहेगी या भाजपा पहली बार राज्य में सरकार बनाने में सफल होगी।









