Burhanpur Sant Samagam: Burhanpur: धर्म नगरी बुरहानपुर में इन दिनों आध्यात्मिक माहौल देखने को मिल रहा है। प्रयागराज से पधारे श्री पंचायती बड़ा उदासीन निर्वाण आश्रम अखाड़ा के करीब 60 से 70 साधु-संतों का दल सिंधीपुरा स्थित कांच मंदिर पहुंचा। संतों के आगमन पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
संतों ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है। उन्होंने समाज को धर्म, संस्कार और राष्ट्र के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। संत समाज ने देशभर में भ्रमण कर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संकल्प भी दोहराया।
Burhanpur Sant Samagam: Burhanpur: आदित्यानंद जी महाराज ने कहा कि संत समाज लगातार लोगों को सनातन धर्म के मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि समाज को सही दिशा देना संतों का कर्तव्य है।
वहीं रामनवमीदास जी स्वामी ने कहा कि हर सनातनी और हर देशभक्त को जागृत करना ही संतों का धर्म है। उन्होंने भगवा रंग को त्याग, तपस्या और जागरण का प्रतीक बताते हुए धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
Burhanpur Sant Samagam: Burhanpur: इस दौरान महंत रामदास पूरणदास उदासीन ने संतों के आगमन को बुरहानपुर का सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा के दौरान संतों का यह पहला आगमन है, जिससे श्रद्धालुओं को उनके दर्शन का लाभ मिला।









