Burhanpur News : बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)। दीपावली का पर्व केवल रोशनी का नहीं, बल्कि मेल-मिलाप और सांस्कृतिक एकता का भी उत्सव है। बुरहानपुर में गुजराती मोढ़ वणिक समाज ने एक बार फिर इस भावना को जीवंत कर दिया। श्री संकल पंच गुजराती मोढ़ वणिक समाज के तत्वाधान में आयोजित ‘पंखुड़ी गरबा रास’ ने इस बार भी पूरे शहर का ध्यान खींचा।
Burhanpur News : पिछले नौ वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह आयोजन, समाज की श्रद्धा, भक्ति और मजबूत संगठन का प्रतीक बन चुका है।
दीपावली पर देश-विदेश से जुटे समाजजन
पंखुड़ी गरबा रास का आयोजन हर साल समाज के मंगल भवन वाडी में किया जाता है। इसकी खास बात यह है कि यह आयोजन दीपावली के ठीक बाद पड़वा, दूज और तीज के शुभ दिनों में रखा जाता है। इस समय को चुनने का मुख्य कारण यह है कि देश-विदेश के अलग-अलग शहरों और राज्यों में रहने वाले समाजजन भी अपने घर दीपावली मनाने आते हैं और इस उत्सव में शामिल हो पाते हैं।
करीब दो से तीन हज़ार समाजजन इस रंगारंग गरबा रास में हिस्सा लेते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में युवक-युवतियाँ शामिल होती हैं।
संस्कृति, एकता और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक
यह भव्य आयोजन अब गुजराती मोढ़ वणिक समाज का एक वार्षिक उत्सव बन गया है, जहाँ सामूहिक नृत्य और संगीत के माध्यम से दीपावली की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान होता है।
समाज सचिव व आयोजक उपेंद्रनाथ गुजराती ने बताया कि यह गरबा रास सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह समाज की एकता, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।
रंग-बिरंगे परिधान, संगीत की धुन और गरबा की मनमोहक प्रस्तुति ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि परंपराएं तभी जीवित रहती हैं, जब युवा पीढ़ी उन्हें पूरे उत्साह के साथ अपनाती है।









