Thursday, September 10, 2026
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ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका! H-1B वीजा फीस पर अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला, 1 लाख डॉलर शुल्क रद्द, भारतीय प्रोफेशनल्स को राहत

H-1B Visa Fee Cancelled: एच-1बी वीजा फीस रद्द होने की खबर ने अमेरिका में काम करने की तैयारी कर रहे हजारों विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीयों को बड़ी राहत दी है। अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने H-1B वीजा पर प्रस्तावित 1 लाख डॉलर (करीब 96 लाख रुपए) की अतिरिक्त फीस को रद्द कर दिया है।यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस शुल्क को लेकर कई उद्योग संगठनों और कंपनियों ने आपत्ति जताई थी।

एच-1बी वीजा फीस रद्द मामले में अमेरिकी फेडरल जज रिचर्ड स्टर्न्स ने कहा कि सितंबर 2025 में लागू की गई यह नीति संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी।अदालत के अनुसार इस प्रकार का शुल्क लागू करने की प्रक्रिया में शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर कोर्ट ने इस नीति को निरस्त कर दिया।

सरकार को क्यों माना जा रहा है बड़ा झटका?
एच-1बी वीजा फीस रद्द होने के बाद इस फैसले को अमेरिकी प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अतिरिक्त शुल्क लागू होने पर विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में रोजगार पाने के लिए काफी अधिक आर्थिक बोझ उठाना पड़ता।विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के इस फैसले से कंपनियों और आवेदकों दोनों को राहत मिली है।

किसने दी थी कोर्ट में चुनौती?
एच-1बी वीजा फीस रद्द मामले में अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित कई संगठनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इतनी बड़ी फीस लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस (संसद) के पास है और इसे कार्यकारी आदेश के जरिए लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इन दलीलों पर विचार करते हुए फैसला सुनाया।
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क्या है H-1B वीजा?
एच-1बी वीजा फीस रद्द की चर्चा के बीच यह समझना भी जरूरी है कि H-1B वीजा क्या है।H-1B वीजा अमेरिका का एक विशेष कार्य वीजा है, जिसके माध्यम से कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों और कुशल पेशेवरों को अस्थायी रूप से नौकरी पर रख सकती हैं। यह वीजा मुख्य रूप से आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, रिसर्च और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के लिए उपयोग किया जाता है।

कौन कर सकता है आवेदन?
एच-1बी वीजा फीस रद्द होने के बाद अब फिर से इस वीजा को लेकर रुचि बढ़ सकती है।H-1B वीजा के लिए आमतौर पर उम्मीदवार के पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम बैचलर डिग्री या समकक्ष योग्यता होना आवश्यक होता है। इसके अलावा नियोक्ता को यह भी साबित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या कार्य परिस्थितियों पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

भारतीय पेशेवरों को कैसे मिलेगा फायदा?
एच-1बी वीजा फीस रद्द होने से सबसे अधिक लाभ भारतीय आईटी और तकनीकी क्षेत्र के पेशेवरों को मिल सकता है। हर साल H-1B वीजा पाने वालों में बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की होती है।यदि 1 लाख डॉलर जैसी भारी फीस लागू रहती, तो कई योग्य उम्मीदवारों और कंपनियों के लिए यह आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता था।

आगे क्या हो सकता है?
एच-1बी वीजा फीस रद्द होने के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन इस फैसले को चुनौती देता है या नहीं। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं रहेगा।इस फैसले ने अमेरिका में रोजगार की तलाश कर रहे विदेशी पेशेवरों के लिए राहत का रास्ता खोल दिया है और कंपनियों को भी नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक लचीलापन मिलने की उम्मीद है।

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