MP News: सीहोर। देश आजादी के लगभग आठ दशक पूरे करने की ओर बढ़ चुका है और सरकारें गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे करती हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की ग्राम पंचायत नयापुरा कराड़िया भील की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां करती नजर आती है। यहां आज भी ग्रामीण सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
करीब 450 की आबादी वाले इस गांव के लोग महज 2 किलोमीटर पक्की सड़क के अभाव में वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके दादा और पिता भी सड़क बनने का इंतजार करते रहे और अब उनकी पीढ़ी भी उसी उम्मीद में जिंदगी गुजार रही है।
बारिश में गांव बन जाता है टापू
MP News: ग्रामीणों के मुताबिक बारिश का मौसम आते ही गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से लगभग कट जाता है। कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बच्चे गिरकर घायल हो जाते हैं और पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
बीमार पड़ने पर चारपाई ही बनती है एंबुलेंस
गांव में सड़क नहीं होने का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जननी एक्सप्रेस और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पातीं।यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो परिजन मरीज को चारपाई पर लिटाकर करीब दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाने को मजबूर होते हैं। इसके बाद ही वाहन की व्यवस्था हो पाती है।
सड़क की बदहाली से प्रभावित हो रहा सामाजिक जीवन
गांव की खराब स्थिति का असर अब सामाजिक जीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव के 40 से अधिक युवक अब तक अविवाहित हैं।उनका कहना है कि जब विवाह के लिए रिश्तेदार गांव देखने आते हैं और यहां की टूटी सड़क, कीचड़, बिजली की समस्या और अन्य सुविधाओं का अभाव देखते हैं, तो बिना रिश्ता तय किए ही वापस लौट जाते हैं। इससे युवाओं के विवाह में लगातार मुश्किलें आ रही हैं।
बिजली के खंभे लगे, लेकिन लाइन आज तक नहीं
MP News: गांव में बिजली व्यवस्था भी अधूरी पड़ी है। ग्रामीणों के अनुसार बिजली के खंभे तो लगा दिए गए, लेकिन उन पर अब तक विद्युत लाइन नहीं डाली गई।मजबूरी में लोगों ने अपने स्तर पर अस्थायी तार बिछाकर बिजली की व्यवस्था की है, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार महीनों से बिजली के केबल जमीन पर पड़े हैं, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें खंभों पर नहीं चढ़ाया गया।
ग्रामीण बोले- सिर्फ आश्वासन मिलता है
ग्रामीणों का आरोप है कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग कर चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।उनका कहना है कि विकास के नाम पर गांव आज भी उपेक्षा का शिकार है और वर्षों से हालात जस के तस बने हुए हैं।
आंदोलन की चेतावनी
MP News: ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गांव तक पक्की सड़क नहीं बनाई गई, बिजली लाइन शुरू नहीं की गई और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।ग्रामीणों का कहना है कि अब वे केवल वादे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य देखना चाहते हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी उन्हीं परेशानियों का सामना न करना पड़े।







