Singrauli News: सिंगरौली। जिले के गनियारी स्थित ग्रामीण मध्यांचल बैंक शाखा में कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बैंक कर्मचारियों पर लापरवाही और मनमानी के आरोप लगाते हुए ग्राहकों ने कहा है कि उन्हें बुनियादी बैंकिंग सेवाओं के लिए भी घंटों धूप में इंतजार करना पड़ रहा है। ग्राहकों के अनुसार, बैंक में लंच ब्रेक के दौरान सभी काउंटर बंद हो जाते हैं, जिससे बाहर खड़े लोगों की लंबी कतार लग जाती है। आरोप है कि निर्धारित समय से अधिक समय तक लंच ब्रेक लेने के कारण दूर-दराज से आए ग्रामीणों को घंटों तक चिलचिलाती धूप में खड़ा रहना पड़ता है। इससे विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं और मजदूर वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें अपनी रोजी-रोटी छोड़कर बैंक आना पड़ता है।
Singrauli News: “अपने ही पैसों के लिए करना पड़ रहा इंतजार”
स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बैंकिंग सेवाएं आम जनता की सुविधा के लिए होती हैं, लेकिन यहां उल्टा ग्राहकों को ही परेशान होना पड़ रहा है। एक ग्राहक ने कहा, “हम अपने ही पैसों के लिए बैंक आते हैं, लेकिन हमें ही घंटों सड़क पर खड़ा कर दिया जाता है। यह व्यवस्था पूरी तरह अमानवीय है।”
ऑनलाइन लेनदेन में भी परेशानी
ग्राहकों ने यह भी बताया कि ऑनलाइन लेनदेन के दौरान खाते से राशि कटने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसी स्थिति में जब वे शिकायत लेकर बैंक पहुंचते हैं, तो उन्हें समय पर समाधान नहीं मिलता और कई बार टालमटोल का सामना करना पड़ता है। इससे लोगों में असंतोष और बढ़ रहा है।
व्यवस्था सुधार की उठी मांग
ग्रामीणों ने बैंक प्रबंधन और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही, लंच ब्रेक का स्पष्ट समय निर्धारण, ग्राहकों के लिए छाया एवं बैठने की व्यवस्था तथा काउंटर संचालन में सुधार करने की भी मांग की गई है।
Singrauli News: प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल
Singrauli News: पूरे मामले में अब तक बैंक प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आम जनता की समस्याओं को लेकर जिम्मेदार अधिकारी गंभीर हैं या फिर यह मामला भी अनदेखा कर दिया जाएगा।
Singrauli News: गनियारी शाखा की यह स्थिति न केवल बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि आम नागरिकों के साथ हो रहे व्यवहार पर भी चिंता व्यक्त करती है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन और बैंक के उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और कब तक लोगों को राहत मिलती है।











