Prashant Kishor Priyanka Gandhi Meet : बिहार हार के बाद बंद दरवाजे के पार प्रियंका-प्रशांत किशोर की मुलाकात, तेज हुईं सियासी अटकलें

Rahul Goshwami
प्रशांत किशोर की प्रियंका गांधी से अहम बैठक

नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर एक बार फिर सियासी सुर्खियों में हैं। चुनाव परिणाम आए करीब एक महीने बाद प्रशांत किशोर की कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि इस चुनाव में जहां कांग्रेस को महज 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा, वहीं जन सुराज पार्टी की जमानत तक जब्त हो गई थी।

दो घंटे चली अहम मुलाकात
प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच यह मुलाकात लगभग दो घंटे तक चली। दोनों पक्षों ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के गहरे सियासी मायने हैं। जानकार इसे आगामी पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

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बंगाल और यूपी पर नजर
राजनीतिक दृष्टि से पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश दोनों ही बेहद अहम राज्य हैं। बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में 2027 में चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर जैसे चुनावी रणनीतिकार की भूमिका कांग्रेस के लिए अहम हो सकती है। राजनीति में स्थायी दुश्मनी या दोस्ती नहीं होती—इस सिद्धांत के तहत यह मुलाकात भविष्य की संभावनाओं का संकेत मानी जा रही है।

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कांग्रेस से दूरी कैसे बढ़ी?
प्रशांत किशोर और गांधी परिवार के संबंध नए नहीं हैं। 2021 में जेडीयू से अलग होने के बाद उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के सामने पार्टी के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा था। अप्रैल 2022 में सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थे। हालांकि, ‘एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप’ में शामिल होने का प्रस्ताव मिलने पर प्रशांत किशोर ने कांग्रेस में शामिल होने से इनकार कर दिया।

बिहार चुनाव में मतभेद
इसके बाद दोनों के बीच दूरी बढ़ती चली गई। बिहार चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और SIR जैसे मुद्दों को स्वीकार नहीं किया। अब एक बार फिर हुई यह मुलाकात सियासी रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत मानी जा रही है।

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