MP Community Service Guidelines: मध्य प्रदेश में छोटे अपराधों पर नहीं होगी जेल, लागू हुई ‘कम्युनिटी सर्विस’ गाइडलाइन

VIKASH KHALKHO

भोपाल। Nishaanebaz.com-MP Community Service Guidelines 2026: मध्य प्रदेश में न्याय व्यवस्था को अधिक सुधारात्मक और व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार के गृह विभाग ने ‘मप्र कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस-2026’ की अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब छोटे और पहली बार अपराध करने वाले अपराधियों को सीधे जेल भेजने के बजाय उनसे समाज हित में निःशुल्क सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) कराने का रास्ता साफ हो गया है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के नए प्रावधानों के तहत तैयार की गई इस गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य छोटे अपराधियों को अपनी गलती सुधारने का मौका देना और जेलों में बढ़ती कैदियों की संख्या के दबाव को कम करना है। अदालतें अब अपराध की गंभीरता, अपराधी की उम्र, स्वास्थ्य, आर्थिक व सामाजिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर सजा तय करेंगी।

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इस नई गाइडलाइन के तहत दोषियों को बिना किसी वेतन या मानदेय के निश्चित समयावधि के लिए सामाजिक कार्य सौंपे जाएंगे। सेवा की यह अवधि न्यूनतम 1 दिन से लेकर अधिकतम 60 दिन तक या 40 घंटे से लेकर 240 घंटे तक हो सकती है।

कम्युनिटी सर्विस के तहत मिलने वाले मुख्य कार्य:

  • सार्वजनिक परिसंपत्तियों का रखरखाव: सरकारी अस्पतालों, सार्वजनिक पार्कों, वृद्धाश्रमों, छात्रवासों और अनाथालयों की सफाई व देखभाल।

  • पर्यावरण संरक्षण: वन विभाग के संरक्षण में पौधारोपण करना, पौधों को पानी देना और खरपतवार हटाना।

  • नागरिक सहयोग: पुलिस थानों के सार्वजनिक परिसरों की सफाई, भीड़ नियंत्रण या यातायात व्यवस्था में सहयोग।

  • अभिलेख सुरक्षा: सार्वजनिक पुस्तकालयों और सरकारी कार्यालयों में अभिलेखों व फाइलों के रखरखाव में मदद।

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गाइडलाइन में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि दोषी व्यक्ति कोई कुशल पेशेवर (जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता या लेखाकार) है, तो उसकी योग्यता का उपयोग जरूरतमंद और वंचित वर्गों की मदद के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही महिला अपराधियों की सुरक्षा और गरिमा का विशेष ध्यान रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

कम्युनिटी सर्विस के दौरान अपराधी के साथ किसी भी प्रकार का मानवीय उत्पीड़न या अनुचित बर्ताव न हो, इसकी निगरानी जिला परिवीक्षा अधिकारी (District Probation Officer) करेंगे। निगरानी अधिकारी अदालत को समय-समय पर अपराधी की उपस्थिति और कार्य की प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे। यदि कोई अपराधी सामुदायिक सेवा की शर्तों का उल्लंघन करता है या काम पूरा करने से इनकार करता है, तो अदालत उस सेवा अवधि को पुन: कारावास की सजा में बदल सकती है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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