निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को 21 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच वैश्विक राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है और बड़े देशों के बीच बयानबाजी का दौर जारी है।
ट्रंप का NATO पर तीखा हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) देशों पर खुलकर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ जंग में NATO देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर लिखा कि अमेरिका के बिना NATO एक “कागजी शेर” है और सहयोगी देशों के इस रवैये को वे याद रखेंगे।
ईरान को बताया परमाणु शक्ति
ट्रंप ने ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न देश बताते हुए कहा कि जब खतरा ज्यादा था, तब NATO देश पीछे हट गए। अब जब हालात कुछ हद तक नियंत्रण में हैं, तो वे तेल की कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने में मदद नहीं कर रहे।
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होर्मुज स्ट्रेट पर संकट
ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगा दी है। पहले इस मार्ग से रोजाना 100 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, लेकिन अब आवाजाही काफी सीमित हो गई है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर पड़ा है।
भारत समेत कुछ देशों को राहत
हालांकि ईरान ने अपने मित्र देशों को आंशिक छूट दी है। भारत समेत कुछ देशों के जहाजों को अनुमति दी जा रही है, लेकिन स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है।
वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां बाधा आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा है।
क्या है NATO?
नाटो एक सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी। इसमें अमेरिका, कनाडा और यूरोप के 30 से अधिक देश शामिल हैं। इसका सिद्धांत है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा।मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष और बड़े देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी से वैश्विक स्थिति और जटिल होती जा रही है। आने वाले दिनों में इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।











