Rewa Encroachment Drive : रीवा (विकास बघेल)। शहर के नीम चौराहा स्थित शासकीय मदिरा भंडार गृह के समीप लगभग 2 एकड़ बेशकीमती सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ पहुंचे प्रशासनिक अमले ने दशकों से काबिज लगभग 50 परिवारों के आशियानों को ढहाने की प्रक्रिया शुरू की। यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में लेदर फैक्ट्री के नाम से आवंटित थी, जिस पर लंबे समय से अवैध कब्जा था।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
नायब तहसीलदार यतीश शुक्ला ने मामले की जानकारी देते हुए
बताया कि वोदा बाग की आराजी क्रमांक 866 और 868 भू-अभिलेख में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। इस भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर याचिकाकर्ता रामानुज पांडे द्वारा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन को इस शासकीय भूमि को तत्काल रिक्त कराने के कड़े आदेश दिए थे।
प्रशासन का पक्ष: “नोटिस के बाद भी नहीं खाली की जमीन”
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के पालन में अतिक्रमणकारियों को पहले ही नियमानुसार नोटिस जारी कर मकान खाली करने की पर्याप्त समय-सीमा दी गई थी। चेतावनी के बावजूद जब कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की, तब प्रशासन को बलपूर्वक कार्रवाई (Lau-Lashkar) का सहारा लेना पड़ा। नीम चौराहा के आसपास स्थित इन निर्माणों को गिराकर अब भूमि को शासन के अधीन लिया जा रहा है।
अतिक्रमणकारियों का दर्द: “तीन पुश्तों का आशियाना उजड़ा”
दूसरी ओर, बेघर हुए परिवारों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया। अवैध कब्जाधारी गीता सोंधिया ने रुंधे गले से बताया, “हम तीन पुश्तों से यहाँ रह रहे हैं। नवरात्रि का समय है और हम सभी गरीब श्रमिक वर्ग के लोग हैं। प्रशासन ने हमें न तो कोई नोटिस दिया और न ही सामान निकालने का समय। अब हमारे छोटे-छोटे बच्चे इस धूप और गर्मी में कहाँ जाएंगे?” पीड़ितों का कहना है कि अचानक हुई इस कार्रवाई से उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या हंगामे की स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। नगर निगम वार्ड क्रमांक 8 के इस क्षेत्र में घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हाईकोर्ट के निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जा रहा है।











