निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान, जो महादेव की गहरी भक्त मानी जाती हैं, एक बार फिर चर्चा में हैं। केदारनाथ और अन्य ज्योतिर्लिंगों में उनकी आस्था किसी से छिपी नहीं है, लेकिन अब उनकी यात्रा से जुड़ा एक नया नियम सामने आया है।
दरअसल, बद्री-केदार मंदिर समिति ने चारधाम यात्रा से पहले एक नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत नॉन-हिंदू श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए एफिडेविट देना अनिवार्य होगा।
क्या है नया नियम?
समिति के अनुसार, जो भी गैर-हिंदू श्रद्धालु केदारनाथ या बद्रीनाथ मंदिर में पूजा करना चाहते हैं, उन्हें लिखित रूप में यह प्रमाण देना होगा कि वे सनातन धर्म में आस्था रखते हैं।
यह नियम सभी नॉन-हिंदू विजिटर्स पर लागू होगा, जिसमें सारा अली खान जैसे श्रद्धालु भी शामिल हैं, जो नियमित रूप से केदारनाथ दर्शन के लिए जाती रही हैं।
एफिडेविट में क्या होगा?
नए नियम के तहत श्रद्धालुओं को एक एफिडेविट या लिखित घोषणा देनी होगी, जिसमें वे यह स्पष्ट करेंगे कि:
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वे सनातन धर्म में विश्वास रखते हैं
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हिंदू परंपराओं के अनुसार पूजा करना चाहते हैं
समिति के अध्यक्ष के मुताबिक, जो भी इस शर्त का पालन करेगा, उसे मंदिर में दर्शन और पूजा की अनुमति दी जाएगी।
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सारा अली खान पर भी लागू होगा नियम
हालांकि सारा अली खान एक मुस्लिम परिवार से आती हैं, लेकिन उनकी महादेव के प्रति आस्था और भक्ति कई बार सार्वजनिक रूप से सामने आ चुकी है।ऐसे में अगर वे भविष्य में केदारनाथ या बद्रीनाथ के दर्शन करना चाहेंगी, तो उन्हें भी इस नियम का पालन करना होगा।
#WATCH | ” Sab sanatani hain…Yahan jo bhi hain sanatani hain…Wo bhi sanatani hai, so why fear in writing down the truth,” says BJP MP Kangana Ranaut, on reports of Badrinath, Kedarnath Temple Committee Chairman asking actor Sara Ali Khan to submit an affidavit to offer… pic.twitter.com/Zz5V4bsnai
— ANI (@ANI) March 18, 2026
कंगना रनौत का बयान
इस पूरे मामले पर अभिनेत्री कंगना रनौत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि“सब सनातनी हैं, सत्य लिखने में डर कैसा? जो मानते हैं, वे लिख दें।”
धार्मिक बहस तेज
इस नए नियम के लागू होने के बाद धार्मिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।कुछ लोग इसे परंपराओं की रक्षा के रूप में देख रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे व्यक्तिगत आस्था से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।आने वाले समय में यह मुद्दा और भी चर्चा में रह सकता है।











