Wednesday, August 26, 2026
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Sehore SI Thar Accident : आष्टा थार कांड : ‘नशे में थी एसआई, पुलिस ने भगाया’, परिजनों के गंभीर आरोपों से पुलिस महकमे में हड़कंप

Sehore SI Thar Accident : सीहोर। आष्टा में पदस्थ महिला सब इंस्पेक्टर (SI) किरण राजपूत की थार गाड़ी से हुई भीषण दुर्घटना के मामले में अब पुलिस प्रशासन के खिलाफ जनआक्रोश भड़क उठा है। न्याय की मांग को लेकर मृतक के परिजन और घायल पक्ष आज पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। परिजनों का आरोप है कि पुलिस विभाग अपनी ही अधिकारी को बचाने के लिए जांच की दिशा भटका रहा है और मुख्य आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं की गई है।

मामला पिछले दिनों का है जब आष्टा में पदस्थ एसआई किरण राजपूत ने अपनी थार जीप से झगरिया चौराहे पर चार लोगों को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका इलाज फिलहाल भोपाल के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का दावा है कि दुर्घटना के समय महिला एसआई नशे की हालत में थी, लेकिन पुलिस ने जानबूझकर उनका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया।

एसपी ऑफिस में धरने के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब परिजनों की कोतवाली टीआई रवीन्द्र यादव से तीखी बहस हुई। परिजनों ने सीधा आरोप लगाया कि पुलिस ने ही घटना के तुरंत बाद किरण राजपूत को मौके से भगाने में मदद की। उन्होंने सवाल उठाया कि नामजद एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपी एसआई को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है? परिजनों का कहना है कि पुलिस अपनी सहकर्मी को बचाने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर रही है।

परिजनों ने टीआई से बहस के दौरान यह भी कहा कि आम आदमी के साथ ऐसी घटना होती तो अब तक जेल में होता, लेकिन वर्दी के रसूख के कारण न्याय में देरी की जा रही है। उन्होंने मांग की है कि आरोपी एसआई का नार्को टेस्ट कराया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया जाए। परिजनों के इन गंभीर आरोपों ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

फिलहाल, पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर भारी संख्या में लोग डटे हुए हैं और प्रशासन से आरोपी एसआई की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। परिजनों ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें न्याय का ठोस आश्वासन नहीं मिलता और आरोपी सलाखों के पीछे नहीं पहुँचती, उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। इस मामले ने अब सीहोर जिले में एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है।

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