नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में तेजी से फैल रहे ईबोला वायरस को ‘अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ (Global Health Emergency) घोषित कर दिया है। इस बार अफ्रीका में मचे इस Ebola Outbreak Africa (ईबोला का प्रकोप) के पीछे ‘बुंडीबुग्यो’ (Bundibugyo) नामक एक बेहद खतरनाक और नया स्ट्रेन है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि ईबोला के इस विशेष प्रकार के खिलाफ लड़ने के लिए वर्तमान में दुनिया के पास कोई भी प्रामाणिक वैक्सीन या एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है।
ज़ैरे स्ट्रेन से कितना अलग है बुंडीबुग्यो? (Bundibugyo Strain Threat)
चिकित्सा विज्ञानियों के मुताबिक, इंसानों में ईबोला संक्रमण मुख्य रूप से ज़ैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से फैलता है। जहां ज़ैरे स्ट्रेन में मृत्यु दर 60 से 90 प्रतिशत तक होती है, वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन में मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम यानी 34 से 40 प्रतिशत (कुछ गंभीर मामलों में 50 फीसदी तक) देखी गई है। हालांकि, वैक्सीन न होने के कारण यह स्ट्रेन बेहद तेजी से आबादी को अपनी चपेट में ले रहा है, जिसके चलते डीआरसी के इटुरी प्रांत में 17वीं बार ईबोला का भयंकर प्रकोप देखा जा रहा है।
चमगादड़ों से इंसानों में पहुंचा वायरस, हवा से नहीं फैलता
वैज्ञानिकों का मानना है कि डीआरसी के घने उष्णकटिबंधीय जंगलों में रहने वाले फलभक्षी चमगादड़ (फ्रूट बैट्स) और जंगली जानवर इस वायरस के मुख्य स्रोत हैं। राहत की बात यह है कि यह कोरोना की तरह हवा या पानी के जरिए नहीं फैलता। यह संक्रमण केवल संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों (जैसे खून, लार, उल्टी या दस्त) के सीधे संपर्क में आने से या किसी मृत मरीज के शव को छूने से फैलता है।
शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे (Viral Hemorrhagic Fever)
इस खतरनाक Viral Hemorrhagic Fever (विषाणुजन्य रक्तस्रावी बुखार) के लक्षण संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर सामने आते हैं।
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शुरुआती चरण: मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द, कमजोरी और गले में खराश होती है।
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दूसरा चरण: कुछ दिनों बाद उल्टी, दस्त और पेट दर्द शुरू हो जाता है।
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गंभीर चरण: बीमारी बढ़ने पर मरीज की आंखों, मसूड़ों और अंदरूनी अंगों से खून बहने लगता है, त्वचा पर चोट के निशान पड़ जाते हैं और अंततः मल्टी-ऑर्गन फेलियर (अंगों का काम बंद करना) के कारण मरीज की मौत हो जाती है।
इलाज नहीं, केवल सपोर्टिव केयर ही एकमात्र सहारा
दवा के अभाव में डॉक्टरों का पूरा ध्यान मरीज की ‘सिम्पटोमैटिक केयर’ (लक्षणों के आधार पर इलाज) पर केंद्रित है। अस्पताल में भर्ती कर मरीजों के शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा किया जाता है, ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता है और गंभीर स्थिति में ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त चढ़ाना) किया जाता है। यदि शुरुआती स्टेज में ही मरीज को आइसोलेट (अलग) कर दिया जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है।
वैश्विक स्तर पर अलर्ट, बॉर्डर पर निगरानी तेज (Epidemic Surveillance Protocol)
कांगो की राजधानी किंशासा और युगांडा की राजधानी कंपाला जैसे घने शहरों में मामले सामने आने के बाद डब्ल्यूएचओ ने सभी पड़ोसी देशों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है। डब्ल्यूएचओ ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाने के बजाय प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए सख्त Epidemic Surveillance Protocol (महामारी निगरानी नियम) लागू किया है, जिसके तहत संदिग्ध यात्रियों को 21 दिनों तक सख्त चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। सीमावर्ती इलाकों में जारी राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद स्वास्थ्य टीमें ग्राउंड जीरो पर एक्टिव हैं।









