नई दिल्ली: नई दिल्ली: सोमवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चर्चा की शुरुआत की। एक घंटे तक चले भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि “वंदे मातरम् अंग्रेजों को करारा जवाब था और यह नारा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”
वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व
पीएम मोदी ने वंदे मातरम् की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब 50 साल पूरे हुए थे, तब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। 100 साल पूरे होने पर देश आपातकाल जैसी परिस्थितियों से जूझ रहा था। आज 150 वर्ष पूरे होने पर भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
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1906 का बारीसाल किस्सा
पीएम मोदी ने बारीसाल (अब बांग्लादेश) में 20 मई 1906 को हुए वंदे मातरम् जुलूस का जिक्र किया। इसमें 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे। हिंदू और मुस्लिम सहित सभी धर्मों और जातियों के लोग वंदे मातरम् के झंडे लेकर सड़कों पर उतरे थे।
बंगाल में वंदे मातरम् की भूमिका
पीएम ने कहा कि बंगाल में स्वतंत्रता सेनानी वंदे मातरम् का नारा लेकर फांसी तक चले गए। बंगाल की एकता और देशभक्ति की भावना में यह गीत गली–गली में गूंजता था।
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नेहरू और मुस्लिम लीग का विवाद
मोदी ने बताया कि मोहम्मद अली जिन्ना ने 15 अक्टूबर 1936 को वंदे मातरम् के खिलाफ विरोध जताया। कांग्रेस अध्यक्ष नेहरू ने इसके खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए और मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए। पांच दिन बाद नेहरू ने नेताजी को चिट्ठी लिखी और मुस्लिम भावनाओं का हवाला देते हुए वंदे मातरम् की समीक्षा की।
कांग्रेस और वंदे मातरम्
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए। INC की नीतियों के चलते यह विवाद बना और कांग्रेस की सख्ती और दृढ़ता पर सवाल उठे।लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया। पीएम मोदी ने दोपहर 12 बजे चर्चा का उद्घाटन किया। विपक्ष की ओर से उपनेता प्रतिपक्ष गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी।









