Gwalior News : ग्वालियर /भूपेन्द्र भदौरिया : सुबह 9 बजे से 2 बजे तक रहते हैं स्कूल.. बंजारे का पुरा शासकीय प्राथमिक स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है.. छत से पानी टपक रहा है प्लास्टर बच्चों के ऊपर गिर रहा है. ग्वालियर जिले में शासकीय स्कूलो की जर्जर स्थिति को देख बच्चों के साथ उनके पालक भी स्कूल में जाने को मजबूर हैं,जितना समय बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं उतने समय तक उनके पालक भी स्कूल में मौजूद रहते हैं,साथ ही स्कूल की जर्जर हालात को देखकर वह अपने बच्चों को क्लास रूम की जगह स्कूल के बाहर बने चबूतरे पर बैठाकर पढ़ाने के लिए मजबूर है, ग्वालियर ग्रामीण इलाके के मुरार डबका ग्राम पंचायत में आने वाले गांव बंजारे का पूरा शासकीय प्राथमिक स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है.
Gwalior News : छत का प्लास्टर गिर रहा है, दिवाले जर्जर है,बारिश होते ही पानी भर जाता है,इस पूरे स्कूल में लगभग 40 के आसपास छात्र छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं,स्कूल की जर्जर हालात को लेकर कई बार स्कूल टीचरों के द्वारा पत्राचार कर जिला शिक्षा अधिकारी को लिखा है लेकिन आज तक इस जर्जर स्कूल की हालत जस की तस बनी हुई है, प्रशासन की इस लापरवाही को साफ तौर पर किसी बड़े हादसे को न्यौता देने जैसा है,स्कूल में पढ़ाई कर रहे बच्चों के पलको का कहां है कि जिस तरह राजस्थान के झालावाड़ में जर्जर स्कूल गिरने से जो हादसा हुआ शायद ग्वालियर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ऐसे ही किसी हादसे का इंतजार कर रहा है.
Gwalior News : कई बार स्कूल की जर्जर भवन को लेकर जनप्रतिनिधियों से भी शिकायत की पर किसी ने स्कूल की ओर ध्यान नहीं दिया और इसी लिए वह लोग अपने बच्चों के साथ पढ़ाई के समय तक स्कूल ने मौजूद रहते हैं कि कही कोई बच्चा पढ़ाई के दौरान जर्जर स्कूल की बिल्डिंग में न जा सके नहीं तो काफी भी हादसा हो सकता है,इस जर्जर हालात भरे स्कूल में बढ़ने वाले बच्चों में भी डर बना हुआ है।
Gwalior News : कुछ बच्चे तो ऐसी है जिनके पालक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार ही नही है,क्योंकि जो हालत स्कूल की है वह बहुत ही डरावनी और भयभीत कर देने वाली हैं, और अगर समय रहते इस जर्जर स्कूल की बिल्डिंग की सुध नहीं ली तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है,क्योंकि कई बार स्कूल टीचरों के द्वारा बिल्डिंग की हालत को लेकर शिकायत करने के बाद भी एक लंबा समय बीत जाने के बाद भी अभी तक हालात नहीं सुधरे तो इस जिम्मेदार अधिकारी की कितनी बड़ी लापरवाही है यह तो साफ नजर आ रही है.









