Vedanta ED Raid: नई दिल्ली। दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले वेदांता ग्रुप के दिल्ली और मुंबई स्थित मुख्य कार्यालयों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी छापेमारी की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा यह सर्च ऑपरेशन फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर अंजाम दिया गया है। ईडी की इस अचानक हुई कार्रवाई की खबर जैसे ही दलाल स्ट्रीट और वित्तीय बाजारों में फैली, कंपनी के शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में इंट्राडे कारोबार के दौरान वेदांता लिमिटेड के शेयर अपने ‘डे हाई’ से 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 328.30 रुपये के स्तर पर आ गए, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया।
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मूल कंपनी को किए गए रॉयल्टी भुगतान से जुड़ा है पूरा मामला
आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय वित्तीय जांच एजेंसी ईडी की यह जांच मुख्य रूप से वेदांता लिमिटेड द्वारा अपनी ब्रिटेन स्थित मूल कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ को किए गए भारी-भरकम रॉयल्टी पेमेंट से जुड़ी हुई है। एजेंसी को आशंका है कि इस वित्तीय लेनदेन और रॉयल्टी भुगतान की प्रक्रिया में फेमा (FEMA) के तय दिशा-निर्देशों और विदेशी मुद्रा विनिमय नियमों की अनदेखी की गई है। ईडी की टीमें दोनों महानगरों के दफ्तरों में मौजूद वित्तीय दस्तावेजों, डिजिटल डेटा और बैंक ट्रांसफर से जुड़े रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच कर रही हैं।
जांच अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग के प्रति प्रतिबद्ध: वेदांता
इस पूरे मामले और छापेमारी पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए वेदांता लिमिटेड के प्रवक्ता ने कहा, “हम संबंधित जांच अधिकारियों के साथ पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं और उनके द्वारा मांगी गई सभी आवश्यक जानकारियां व दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हमारी कंपनी देश के सभी लागू कानूनों, विनियमों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के अनुपालन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चूंकि यह मामला वर्तमान में एक नियामकीय प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है, इसलिए इस चरण पर हम इससे संबंधित कोई भी अतिरिक्त या व्यावसायिक टिप्पणी करने में असमर्थ हैं।”
डिमर्जर और शेयर बाजार में कंपनी का हालिया प्रदर्शन
उल्लेखनीय है कि वेदांता लिमिटेड इन दिनों अपने डिमर्जर (व्यवसाय के विभाजन) की प्रक्रिया को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। बीते मई महीने में कंपनी ने अपने एलुमिनियम, ऑयल एंड गैस, और आयरन एंड स्टील बिजनेस का सफल डिमर्जर पूरा किया था। ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के मुताबिक, सभी अलग हुई कॉर्पोरेट इकाइयां जून के अंत तक स्वतंत्र कंपनियों के तौर पर शेयर बाजार में ट्रेड करने लगेंगी।
अगर शेयरों के पिछले प्रदर्शन की बात करें, तो इस झटके के बावजूद कंपनी ने दीर्घकालिक निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। पिछले एक महीने में स्टॉक में 29 फीसदी और 6 महीने में 75 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। वहीं, एक साल के भीतर वेदांता के शेयरों का भाव 117 प्रतिशत तक बढ़ा है, जिसका 52 सप्ताह का उच्च स्तर 360.70 रुपये और निम्न स्तर 151.13 रुपये है। वर्तमान में कंपनी का कुल मार्केट कैप 1.32 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। इसके अलावा कंपनी अपने निवेशकों को लगातार तगड़ा डिविडेंड भी देती आ रही है, जहां मार्च तिमाही में प्रति शेयर 11 रुपये का डिविडेंड योग्य निवेशकों को दिया गया था। फिलहाल, बाजार विशेषज्ञों की नजरें ईडी की इस जांच के आगामी रुख पर टिकी हुई हैं।









