BALCO और Vedanta में लगातार हादसे! आखिर मजदूरों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन? क्या सिर्फ कागजों में हैं सुरक्षा नियम?

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कोरबा :  छत्तीसगढ़ में BALCO और Vedanta समूह के औद्योगिक संयंत्र एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में हैं। कोरबा स्थित भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) के वेदांता संयंत्र में हुए ताजा हादसे ने न सिर्फ एक श्रमिक को गंभीर रूप से घायल कर दिया, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों की हकीकत भी उजागर कर दी है।

काम के दौरान हादसा, तीन उंगलियां कटीं

जानकारी के मुताबिक BALCO के टाउनशिप विभाग में कार्यरत श्रमिक गणेश राम नियमित काम के दौरान ग्राइंडर मशीन की चपेट में आ गए। हादसे में उनके हाथ की तीन उंगलियां कट गईं। सहकर्मियों का आरोप है कि उन्हें बिना सुरक्षा ग्लव्स और जरूरी सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा था। यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो यह गंभीर हादसा टाला जा सकता था।

एंबुलेंस नहीं मिली, बाइक से पहुंचाया अस्पताल

घटना के बाद प्रबंधन की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई। आरोप है कि घायल श्रमिक को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई और उन्हें बाइक से अस्पताल पहुंचाना पड़ा। फिलहाल उनका इलाज BALCO अस्पताल में जारी है।इस घटना ने आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और कंपनी की संवेदनशीलता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिवार पर टूटा संकट

गणेश राम परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद उनके परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट गहरा गया है। पत्नी और बच्चों की चिंता अब भविष्य को लेकर बढ़ गई है।

स्थानीय श्रमिक संगठनों का कहना है कि कंपनियां उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देती हैं, लेकिन श्रमिकों की सुरक्षा अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती है।

पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे

BALCO और Vedanta समूह के संयंत्रों में यह पहली दुर्घटना नहीं है। अक्टूबर 2025 में कोरबा BALCO प्लांट का करीब 20 साल पुराना ESP संयंत्र अचानक गिर गया था। हालांकि उस समय जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन घटना ने प्लांट की सुरक्षा स्थिति पर सवाल खड़े किए थे।इसके अलावा 2009 में निर्माणाधीन चिमनी गिरने से 45 मजदूरों की मौत हो गई थी। उस हादसे का मामला अब भी अदालत में लंबित है।

सक्ती वेदांता पावर प्लांट हादसे ने बढ़ाई चिंता

14 अप्रैल 2026 को सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट हुआ था। ट्यूब फटने से हुए भीषण विस्फोट में अब तक 25 मजदूरों की मौत हो चुकी है। इस हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या बड़े उद्योगों में सुरक्षा प्रोटोकॉल सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित हैं? क्या नियमित निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट सही तरीके से हो रहे हैं?
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जांच के बाद भी क्यों नहीं बदलती तस्वीर?

हर हादसे के बाद जांच, रिपोर्ट और कार्रवाई की बातें जरूर होती हैं, लेकिन जमीन पर सुधार नजर नहीं आता। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि उद्योगों के दबाव में कई बार सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल नियम बनाना काफी नहीं है, बल्कि उनका सख्ती से पालन और जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी है।

उठ रही हैं ये प्रमुख मांगें

  • जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई
  • सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपकरण
  • नियमित सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण
  • आपातकालीन मेडिकल सिस्टम को मजबूत करना
  • हादसों की निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करना
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