Paper Leak Parliament Discussion: पेपर लीक पर संसद में चर्चा को लेकर देश की राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। एक ओर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन जारी है, वहीं दूसरी ओर संसद के मानसून सत्र का तीसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। सरकार और विपक्ष दोनों चर्चा की बात कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सदन में बहस शुरू नहीं हो सकी।
पेपर लीक पर संसद में चर्चा की मांग को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर छात्रों के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया और संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
सरकार और CJP के बीच बातचीत का प्रस्ताव
इस बीच पेपर लीक पर संसद में चर्चा के माहौल के बीच सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का प्रस्ताव भी सामने आया। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि उन्हें भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात का संदेश मिला था, लेकिन संगठन ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।CJP का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो बातचीत किसी तटस्थ स्थान या जंतर-मंतर पर होनी चाहिए।
अभिजीत दिपके ने सोनम वांगचुक से की अपील
पेपर लीक पर संसद में चर्चा के बीच CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा और जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।उन्होंने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
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तीसरे दिन भी क्यों नहीं हो सकी बहस?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेपर लीक पर संसद में चर्चा आखिर शुरू क्यों नहीं हो रही। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों चर्चा चाहते हैं, लेकिन पहले आपसी सहमति बनाना जरूरी है। लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।राज्यसभा में भी सरकार की ओर से जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन गतिरोध खत्म होना चाहिए।
सरकार और विपक्ष की अलग-अलग मांगें
पेपर लीक पर संसद में चर्चा को लेकर दोनों पक्षों की प्राथमिकताएं अलग दिखाई दे रही हैं।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि सरकार पहले दिन से चर्चा के लिए तैयार है। वहीं विपक्ष का कहना है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाब के बिना बहस का कोई मतलब नहीं है।सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी छात्रों के साथ हुई घटनाओं को चर्चा का मुख्य विषय बनाने की मांग की।
चर्चा के नियमों पर भी बना है विवाद
राज्यसभा में विपक्ष नियम 267 के तहत चर्चा चाहता है, जबकि लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव के जरिए बहस की मांग की जा रही है। इन दोनों प्रक्रियाओं में सदन का सामान्य कामकाज रोककर संबंधित मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होती है। सरकार और विपक्ष के बीच इसी प्रक्रिया को लेकर भी सहमति नहीं बन पा रही है।
दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई
पेपर लीक पर संसद में चर्चा और लगातार चल रहे आंदोलन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर और संसद के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा कारणों से कुछ मेट्रो स्टेशनों पर भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर सरकार और विपक्ष के अगले कदम पर है। यदि दोनों पक्ष चर्चा के प्रारूप पर सहमत होते हैं तो संसद में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस शुरू हो सकती है। फिलहाल संसद के भीतर गतिरोध और बाहर आंदोलन दोनों जारी हैं, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है।







