West Bengal elections : कोलकाता: बिहार चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद भाजपा अब पश्चिम बंगाल में सत्ता पर काबिज होने की तैयारी में जुट गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि बिहार के बाद अब बंगाल की बारी है और ‘जंगलराज’ को हटाने का अभियान वहां भी चलेगा।
बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल चुनौतीपूर्ण राजनीतिक मैदान है। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी 77 सीटों पर सिमट गई थी। हालांकि, 2019 के आम चुनाव में कुछ उम्मीद की किरण दिखी थी। इस बार बीजेपी के रणनीतिकार बिहार चुनाव के अनुभवों को बंगाल में लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।
West Bengal elections : बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही घोषणा की है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो टाटा ग्रुप को वापस बंगाल लाया जाएगा। इसके अलावा पलायन और रोजगार को लेकर भी पार्टी आंदोलन तेज करने वाली है।

वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सक्रिय मोर्चेबंदी कर चुकी हैं। उन्होंने प्रवासी मजदूरों को बंगाल लौटने का भरोसा दिलाया और केंद्र सरकार के खिलाफ भाषा और दार्जिलिंग पहाड़ियों के गोरखा मसले पर विरोध शुरू कर दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि बिहार और बंगाल का राजनीतिक माहौल काफी अलग है। बिहार में बीजेपी जेडीयू के साथ गठबंधन में है, जबकि पश्चिम बंगाल में उन्हें ममता बनर्जी और टीएमसी के सीधे मुकाबले का सामना करना होगा।
West Bengal elections : 2025 के चुनावी परिदृश्य में सवाल यही है कि बिहार और दिल्ली में अपनाई गई रणनीति पश्चिम बंगाल में कितनी कारगर साबित होगी। बीजेपी की तैयारी अपनी जगह है, लेकिन ममता बनर्जी के पास भी अपना राजनीतिक अनुभव और मजबूत संगठन है, जो उन्हें चुनौती देने में मदद करेगा।
निष्कर्ष: बिहार जीत ने बीजेपी के उत्साह को बढ़ाया है, लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ संघर्ष आसान नहीं होगा। आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।









