Mahakal Bhasma Aarti Ujjain : मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार तड़के एक बार फिर आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न हुई महाकाल की भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।
सुबह करीब चार बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, श्रद्धालुओं की आंखों में उत्साह और चेहरे पर भक्ति साफ दिखाई देने लगी। दूर-दूर से आए भक्त उस क्षण का इंतजार कर रहे थे, जब बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन होंगे।
रातभर इंतजार के बाद मिले बाबा के दर्शन
महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही कतारों में खड़े नजर आए। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से पहुंचे भक्त भी इस अद्भुत अनुष्ठान का हिस्सा बनने उज्जैन पहुंचे थे।
मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना रहा। जैसे ही मंदिर के अंदर प्रवेश मिला, भक्त “महाकाल… महाकाल…” का जाप करते हुए भाव-विभोर दिखाई दिए।
पंचामृत अभिषेक से शुरू हुआ दिव्य अनुष्ठान
Mahakal Bhasma Aarti Ujjain भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का पारंपरिक पंचामृत अभिषेक किया गया। जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से विधिवत अभिषेक के दौरान गर्भगृह में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई दी।
रुद्रपाठ, शंखध्वनि और घंटियों की मधुर ध्वनि ने मंदिर के वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु इस आध्यात्मिक दृश्य को अपने मोबाइल और कैमरों में कैद करने की कोशिश करते नजर आए, हालांकि गर्भगृह में नियमों का विशेष पालन कराया गया।
क्यों खास है महाकाल की भस्म आरती?
महाकाल भस्म आरती देशभर में अपनी अलग पहचान रखती है। सनातन परंपरा में भस्म को वैराग्य और जीवन की नश्वरता का प्रतीक माना गया है।
अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष भस्म श्रृंगार किया गया। माना जाता है कि यह आरती भक्तों को यह संदेश देती है कि जीवन क्षणभंगुर है और ईश्वर भक्ति ही सबसे बड़ा सत्य है।यही कारण है कि हर दिन हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक आरती का हिस्सा बनने उज्जैन पहुंचते हैं।









