Supreme Court Order : सुप्रीम कोर्ट की फटकार! हाईवे-सड़कों से तुरंत हटाए जाएं आवारा मवेशी, क्या अब जागेगी साय सरकार

Rahul Goshwami
supreme court

Supreme Court Order/नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर की एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और अन्य सड़कों से मवेशियों व आवारा पशुओं को हटाना सुनिश्चित करें। अदालत ने एनएचएआई (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) और राज्य सरकारों को ऐसे स्थानों की पहचान के लिए संयुक्त अभियान चलाने को कहा, जहां आवारा जानवर अक्सर सड़कों पर दिखाई देते हैं।

स्कूलों और अस्पतालों में कुत्तों का प्रवेश रोकने का आदेश

Supreme Court Order इस बाबत शीर्ष अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों में बढ़ते आवारा कुत्तों के खतरे पर चिंता जताई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकारी और निजी दोनों प्रकार के परिसरों में आवारा कुत्तों को प्रवेश न दिया जाए और उन्हें चिन्हित शेल्टरों में भेजा जाए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक व्यवहारिक व्यवस्था बनाई जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होगी।

Read More : Chhattisgarh Mahatari Statue : रायपुर में बड़ा बवाल: अमित बघेल के बयान पर सिंधी-अग्रवाल समाज का चक्काजाम, गिरफ्तारी की मांग तेज

राज्यों को बनानी होंगी विशेष हाईवे पेट्रोल टीमें

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और नगर निगमों को विशेष हाईवे पेट्रोल टीम गठित करने का आदेश दिया है। ये टीमें सड़कों पर घूम रहे पशुओं को पकड़कर सुरक्षित आश्रय गृहों या गौशालाओं में पहुंचाने का कार्य करेंगी। कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा के साथ-साथ पशु कल्याण पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए।

सड़क दुर्घटनाओं पर बढ़ती चिंता

Supreme Court Order कोर्ट ने टिप्पणी की कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर आवारा पशुओं की वजह से दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसे रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर ठोस रणनीति तैयार करनी होगी। अदालत ने कहा कि लापरवाही की स्थिति में इसे “गंभीर प्रशासनिक असफलता” माना जाएगा।

छत्तीसगढ़ में चल रहा विशेष अभियान

इधर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच, छत्तीसगढ़ सरकार ने सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए एक माहभर का विशेष अभियान शुरू किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका अधिकारियों को आदेश जारी किया है कि वे परिवहन विभाग की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।

Read More : Chhattisgarh SIR fake Voters : फर्जी वोटर’ पर आर-पार, भाजपा बोली- रायपुर से कटेंगे 1 लाख नाम; कांग्रेस का पलटवार- 400 टीमें बनाएगी पार्टी…

Supreme Court Order इस SOP में सड़क सुरक्षा, निगरानी टीमों का गठन, आवारा पशुओं के पुनर्वास और पशु मालिकों की जागरूकता जैसी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। अभियान के तहत उच्च और मध्यम जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। आवारा मवेशियों को ‘काऊ कैचर’ की मदद से पकड़कर गौशालाओं, गौ अभयारण्यों, कांजी हाउस और गोठानों में भेजा जा रहा है। पशु मालिकों को सूचना देकर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है।

हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले में गायों की मौत के मामलों पर राज्य सरकार की कार्रवाई को “गैर-जिम्मेदाराना” बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि “मानवीय संवेदनशीलता पर गहरा आघात” बताया था।

Share The News
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *