Singrauli News :सिंगरौली : सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। जिले के कन्या हायर सेकंडरी स्कूल बैढ़न में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से की गई सामग्री खरीदी में लाखों रुपए की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि महज़ 10 लाख रुपये कीमत का सामान 51 लाख रुपये में खरीदा गया और चौंकाने वाली बात यह है कि ये उपकरण पिछले एक साल से स्कूल में धूल खा रहे हैं, उपयोग तक नहीं हो पाया।
Singrauli News : सामग्री खरीद की चौंकाने वाली सूची…
Singrauli News : सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, DMF मद से स्कूल के लिए निम्नलिखित उपकरण खरीदे गए जहां 10 आलमारी,10 कंप्यूटर,1 एसी,स्मार्ट बोर्ड,प्रिंटर इनकी वास्तविक बाज़ार कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी गई है, लेकिन बिल में कीमत 51 लाख रुपये दर्शाई गई है। स्मार्ट क्लास का बहाना, लेकिन उपकरण मुफ्त में मिले थे। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्मार्ट क्लास के नाम पर यह खरीदी क्यों हुई, जबकि NTPC विंध्याचल पहले ही निःशुल्क स्मार्ट क्लास उपकरण उपलब्ध करा चुका है। बावजूद इसके, स्मार्ट क्लास के लिए नए उपकरण बाजार दर से पांच गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए भोपाल से आया दबाव जब इस खरीदी पर सवाल उठे तो शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने चौंकाने वाला खुलासा किया। अधिकारी के मुताबिक, भोपाल स्थित सीएम हाउस से भुगतान कराने का दबाव था, जिसके चलते मजबूरी में फाइल क्लियर करनी पड़ी।
Singrauli News : भोपाल की फर्म के जरिए लेन-देन
Singrauli News : जांच में यह भी सामने आया है कि जिस फर्म के माध्यम से यह खरीदी की गई, वह भोपाल स्थित एक फर्म है। स्थानीय सप्लायर्स या प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे इस फर्म से भारी-भरकम रेट पर सामग्री मंगाई गई। सिर्फ एक स्कूल नहीं, जिले में कई जगह गड़बड़ी है यह मामला सिर्फ कन्या हायर सेकंडरी स्कूल बैढ़न तक सीमित नहीं है। जिले के अन्य कई स्कूलों में भी DMF मद और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत इसी तरह की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ियां होने की बात सामने आ रही है। कई जगह उपकरण खरीदे तो गए, लेकिन न तो उनका इस्तेमाल हुआ और न ही उनकी जरूरत थी।
Singrauli News : जनता के पैसे से खिलवाड़
Singrauli News : DMF मद का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। लेकिन इस मामले में लगता है कि जनता के पैसों का सीधा दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार की मोटी परत चढ़ा दी गई। जवाबदेही और जांच की मांग को लेकर स्थानीय सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने इस घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब एक साल से उपकरण बंद पड़े हैं और पहले से मौजूद सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध थीं, तो आखिर किस मंशा से इतनी बड़ी खरीद की गई? यह मामला न केवल शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं और फंड्स का किस तरह दुरुपयोग हो रहा है। अगर इस पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो DMF मद का असली उद्देश्य पूरी तरह विफल हो जाएगा और जनता का विश्वास खो जाएगा।











