Sunday, September 6, 2026
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Iranian Ship Sri Lanka : हिंद महासागर में बढ़ा तनाव: अमेरिकी हमले में ईरानी युद्धपोत के डूबने के बाद दूसरे जहाज ने श्रीलंका से मांगी ‘आपातकालीन’ मदद

Iranian Ship Sri Lanka : कोलंबो/नई दिल्ली (05 मार्च 2026): हिंद महासागर के जलक्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अब श्रीलंका के मुहाने पर दस्तक दे दी है। अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत ‘आईरिस देना’ (Iris Dena) को टॉरपीडो से उड़ाए जाने के ठीक एक दिन बाद, एक अन्य ईरानी जहाज ने श्रीलंका के बंदरगाह पर रुकने (पोर्ट कॉल) के लिए तत्काल अनुमति मांगी है। श्रीलंका के सांसद नामल राजपक्षे ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि यह जहाज वर्तमान में श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मौजूद है।

नामल राजपक्षे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दूसरा ईरानी जहाज श्रीलंका की क्षेत्रीय जल सीमा के ठीक बाहर खड़ा है। उन्होंने लिखा कि इस जहाज ने मानवीय या तकनीकी कारणों से ‘अर्जेंट पोर्ट कॉल’ के लिए सरकार से अनुमति मांगी है, हालांकि श्रीलंकाई अधिकारियों ने अब तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। यह स्थिति तब बनी है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने गॉल तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी फ्रिगेट को डुबोकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था।

गौरतलब है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने बुधवार को पुष्टि की थी कि उनकी एक पनडुब्बी ने मार्क-48 टॉरपीडो का उपयोग कर ‘आईरिस देना’ को नष्ट कर दिया है। उस जहाज पर सवार लगभग 180 चालक दल के सदस्यों में से 30 से अधिक को श्रीलंकाई नौसेना ने सुरक्षित बचा लिया था, जबकि 80 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। अब दूसरे ईरानी जहाज की उपस्थिति ने क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीलंका सरकार के लिए यह फैसला लेना बेहद पेचीदा होगा। एक ओर ईरान के साथ द्विपक्षीय संबंध और मानवीय संकट का दबाव है, तो दूसरी ओर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने इलाके में भारी दबाव बना दिया है। श्रीलंका के विपक्ष ने भी सवाल उठाया है कि क्या सरकार को अमेरिकी हमले की पूर्व जानकारी थी। यदि कोलंबो इस दूसरे ईरानी जहाज को अनुमति देता है, तो यह अमेरिका के साथ उसके संबंधों में खटास पैदा कर सकता है।

फिलहाल श्रीलंका की नौसेना और तटीय सुरक्षा बल हाई-अलर्ट पर हैं। भारत भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि हिंद महासागर में इस तरह की प्रत्यक्ष सैन्य मुठभेड़ दशकों बाद देखी गई है। आने वाले कुछ घंटों में कोलंबो से मिलने वाली ‘क्लियरेंस’ यह तय करेगी कि यह तनावपूर्ण स्थिति किसी और बड़े टकराव की ओर बढ़ती है या मानवीय आधार पर शांत होती है।

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