Tuesday, September 15, 2026
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Vinai Kumar Saxena Tenure : विनय कुमार सक्सेना का दिल्ली से विदा: तीन साल नौ महीने का रहा विवादों और विकास का सफर

Vinai Kumar Saxena Tenure : नई दिल्ली (06 मार्च 2026): दिल्ली के 22वें उपराज्यपाल के रूप में विनय कुमार सक्सेना का तीन साल नौ महीने का बहुचर्चित कार्यकाल शुक्रवार को संपन्न हो गया। मई 2022 में कार्यभार संभालने के बाद सक्सेना ने खुद को दिल्ली का “लोकल गार्डियन” घोषित किया था। अपने कार्यकाल के दौरान वे राजनिवास के एयर-कंडीशंड कमरों में बैठने के बजाय अक्सर सड़कों पर उतरकर विकास परियोजनाओं का निरीक्षण करते नजर आए। हालांकि, उनका यह कार्यकाल प्रशासनिक उपलब्धियों से अधिक दिल्ली की तत्कालीन आप (AAP) सरकार के साथ हुए ऐतिहासिक राजनीतिक टकरावों के लिए याद किया जाएगा।

सक्सेना का कार्यकाल दिल्ली की सत्ता और राजनिवास के बीच जारी ‘टर्फ वॉर’ का गवाह रहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार के साथ उनके संबंध शपथ ग्रहण के महज एक हफ्ते के भीतर ही तल्ख होने लगे थे। आबकारी नीति (लिक्वर स्कैम), मोहल्ला क्लीनिकों में कथित भ्रष्टाचार, सरकारी स्कूलों के निर्माण में अनियमितता और मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण जैसे मुद्दों पर उन्होंने लगातार जांच के आदेश दिए, जिससे आप सरकार और एलजी के बीच पत्राचार से लेकर अदालती लड़ाई तक का सिलसिला शुरू हो गया।

सक्सेना की कार्यशैली अधिकांश पूर्ववर्ती आईएएस/आईपीएस अफसरों से बिल्कुल अलग थी। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष रहे सक्सेना अपनी कॉरपोरेट पृष्ठभूमि के कारण प्रशासन में एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ अधिकारी के रूप में देखे गए। उन्होंने यमुना पुनर्विकास समिति को पुनर्जीवित किया और असिता पार्क, बांसेरा पार्क व महरौली पुरातत्व पार्क जैसे कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारा। दिल्ली की राजस्व स्थिति में सुधार और G20 शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली के सौंदर्यीकरण में उनकी सक्रिय भूमिका को उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

हालाँकि, उनके और आप सरकार के बीच की कड़वाहट इतनी गहरी रही कि दोनों पक्षों के बीच 20 से अधिक अदालती मामले लंबित रहे। दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया कि एलजी के हस्तक्षेप के कारण शहर की जन-कल्याणकारी योजनाएं और विकास कार्य ठप हो गए थे। लेकिन पिछले महीने दिल्ली में आई नई राजनीतिक व्यवस्था के तहत, सरकार ने एलजी और केंद्र के साथ चल रहे उन सभी कानूनी मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया, जिससे रुके हुए कार्यों में अब तेजी आने की उम्मीद है।

विनय कुमार सक्सेना का यह कार्यकाल दिल्ली के इतिहास में एक ऐसे दौर के रूप में दर्ज रहेगा, जहाँ प्रशासन, राजनीति और संवैधानिक शक्तियों का संघर्ष अपनी पराकाष्ठा पर था। अब जब वे दिल्ली से विदा ले रहे हैं, तो उनके पीछे एक ऐसा शहर है जो अपनी बदलती हुई साख और राजनीतिक स्थिरता की ओर देख रहा है। सक्सेना के बाद अब पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू दिल्ली के नए उपराज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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