M.P News : भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में रेडिएशन सुविधा ठप, हर महीने 1500 कैंसर मरीज प्रभावित

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में कैंसर मरीजों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां हर महीने 1500 से अधिक मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन रेडिएशन थेरेपी की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण उन्हें सिर्फ ओपीडी में सलाह देकर वापस भेजना पड़ रहा है।

अस्पताल में लगी पुरानी कोबाल्ट मशीन वर्षों से खराब पड़ी है, जबकि ब्रेकी थेरेपी यूनिट भी करीब एक साल से बंद है। वहीं कैंसर उपचार के लिए प्रस्तावित डुअल एनर्जी लीनेक मशीन का ऑर्डर अब तक जारी नहीं हुआ, जिससे स्थिति और गंभीर बनी हुई है।

बंद पड़ी हैं कोबाल्ट और ब्रेकी थेरेपी मशीन

जीएमसी में लगी पुरानी कोबाल्ट रेडिएशन मशीन लंबे समय से खराब है और अब इसे डिकमीशन करने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही ब्रेकी थेरेपी मशीन भी एक साल से बंद पड़ी है।

इस वजह से सर्जरी के बाद जिन मरीजों को रेडिएशन की जरूरत होती है, उन्हें अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। कॉलेज की डीन डॉ. कविता एन सिंह के अनुसार रेडिएशन बंकर तैयार हो चुका है और जल्द ही नई मशीनें स्थापित की जाएंगी।

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मरीजों को एम्स और निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा

रेडिएशन सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को एम्स भोपाल या निजी कैंसर अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। एम्स में पहले से ही मरीजों की लंबी कतार होने के कारण इलाज के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है।

वहीं निजी अस्पतालों में रेडिएशन थेरेपी कराने पर डेढ़ से दो लाख रुपए तक का अतिरिक्त खर्च आता है, जो कई मरीजों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ता है।

मेडिकल छात्रों को नहीं मिल रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण

इस समस्या का असर केवल मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने पिछले सत्र में जीएमसी के ऑन्कोलॉजी विभाग की चारों पीजी सीटों की मान्यता रद्द कर दी थी।

हालांकि बाद में कॉलेज प्रशासन द्वारा नई लीनेक मशीन लगाने का आश्वासन देने पर सीटें बहाल कर दी गईं, लेकिन मशीन का ऑर्डर अब तक जारी नहीं होने से पीजी छात्रों को रेडिएशन थेरेपी का क्लिनिकल अनुभव नहीं मिल पा रहा।

अन्य मेडिकल कॉलेजों में मशीनें, लेकिन GMC पीछे

प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों में डुअल लीनेक मशीन लगाने का प्रस्ताव था। जानकारी के मुताबिक चार कॉलेजों के लिए मशीनों के ऑर्डर जारी हो चुके हैं, लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज के लिए अब तक ऑर्डर जारी नहीं हुआ।

राजधानी के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज में ऐसी स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है।

तैयार है हाईटेक रेडिएशन बंकर

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कैंसर उपचार को बेहतर बनाने के लिए रेडिएशन बंकर तैयार कर लिया गया है। इसे एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) के मानकों के अनुसार बनाया गया है।

इस बंकर में तीन मीटर मोटी कंक्रीट की दीवारें और विशेष सुरक्षा शील्डिंग लगाई गई है। अधिकारियों के अनुसार AERB की टीम निरीक्षण के बाद अनुमति देगी और उसके बाद करीब 25 करोड़ रुपए की हाईटेक रेडिएशन यूनिट शुरू की जाएगी।

प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामले

आईसीएमआर की कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब 1.54 लाख मरीजों को तत्काल कैंसर उपचार की जरूरत है। अकेले भोपाल में ही लगभग 4350 मरीज कैंसर से प्रभावित बताए जाते हैं।

राज्य में हर महीने करीब 3500 लोगों की मौत कैंसर के कारण हो रही है। ऐसे में राजधानी के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में रेडिएशन सुविधा का अभाव स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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