Monday, September 7, 2026
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मिडिल ईस्ट तनाव पर ट्रंप की नीतियों पर बरसे चक शूमर, बोले- अमेरिका नहीं चाहता ‘नया युद्ध’

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव के बीच अमेरिका की राजनीति भी गरमा गई है। अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता चक शूमर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी जनता किसी भी कीमत पर नया युद्ध नहीं चाहती।

सीनेट में अपने संबोधन के दौरान शूमर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की मौजूदा रणनीति बेहद खतरनाक दिशा में जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई रिपब्लिकन सांसद भी राष्ट्रपति के इस सैन्य कदम का बिना सवाल किए समर्थन कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है।

जनता की राय: युद्ध के खिलाफ माहौल

चक शूमर ने कहा कि अमेरिका में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोग भी इस संभावित युद्ध का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि रिपब्लिकन समर्थकों से लेकर निर्दलीय मतदाताओं तक, अधिकांश अमेरिकी नागरिक मिडिल ईस्ट में नए सैन्य संघर्ष के पक्ष में नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि जनता को लगता है कि आक्रामक सैन्य नीति और सीनेट की चुप्पी उनके विश्वास के साथ विश्वासघात के समान है।

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रणनीति की कमी पर उठे सवाल

शूमर ने ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा अभियान स्पष्ट दिशा के बिना आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयानों में भी अभियान के उद्देश्यों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यह संघर्ष अब अपने शुरुआती दायरे से निकलकर दक्षिण में हिंद महासागर और उत्तर में अजरबैजान तक फैलने की आशंका पैदा कर रहा है।

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से जनता परेशान

इस सैन्य टकराव का असर अब अमेरिकी नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। शूमर के अनुसार पिछले एक सप्ताह में गैस और ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और अनिश्चित भविष्य को लेकर आम लोग चिंतित हैं और वे चाहते हैं कि सरकार इस टकराव को बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक समाधान पर ध्यान दे।

सीनेट की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

शूमर ने यह भी कहा कि सीनेट के पास ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीतियों को रोकने का महत्वपूर्ण अवसर था, लेकिन वह मौका गंवा दिया गया। उनके अनुसार यह अमेरिकी संसदीय इतिहास का एक निराशाजनक क्षण है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब युद्ध का खतरा बढ़ रहा हो, तब संसद की जिम्मेदारी है कि वह सरकार के फैसलों पर निगरानी रखे और जरूरत पड़ने पर उन्हें चुनौती दे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट संकट को लेकर अमेरिका के भीतर बढ़ता राजनीतिक मतभेद आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

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