Indore News: एमवाय अस्पताल में दर्दनाक तस्वीर! 1 किलोमीटर तक स्ट्रेचर खींचने को मजबूर हुआ परिवार, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

Rahul Goshwami

Indore Hospital Negligence:मध्यप्रदेश के इंदौर से सामने आई इंदौर अस्पताल लापरवाही की एक तस्वीर ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एमवाय अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर उंगलियां उठ रही हैं। आरोप है कि एक बीमार बच्चे को इलाज के लिए ले जाते समय उसके परिवार को करीब एक किलोमीटर तक स्ट्रेचर खींचना पड़ा।

बताया जा रहा है कि भीषण गर्मी के बीच बच्चे की हालत खराब थी। इंदौर अस्पताल लापरवाही से जुड़े इस मामले में बच्चे की मां लगातार अपनी चुन्नी को पानी से भिगोकर उसे ठंडक पहुंचाने की कोशिश करती रही, जबकि पिता स्ट्रेचर को खींचते हुए अस्पताल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक ले जाते रहे।परिवार का कहना है कि इस दौरान उन्होंने कई लोगों से मदद मांगी, लेकिन उन्हें कोई सहायक स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया।

रेफरल सिस्टम पर भी उठे सवाल
परिजनों ने आरोप लगाया कि इंदौर अस्पताल लापरवाही का एक कारण अस्पतालों के बीच रेफरल प्रक्रिया भी है। उनका कहना है कि मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां तक पहुंचाने की उचित व्यवस्था नहीं थी।इस वजह से पहले से परेशान परिवार को खुद ही मरीज को लेकर अस्पताल परिसर में लंबी दूरी तय करनी पड़ी।

स्ट्रेचर और स्टाफ की कमी का दावा
परिवार का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और सहायक कर्मचारी उपलब्ध नहीं थे। इंदौर अस्पताल लापरवाही के आरोपों के बीच यह भी कहा गया कि यदि जरूरी संसाधन समय पर मिल जाते तो मरीज को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है।

15 दिन से इलाज करा रहा है परिवार
जानकारी के मुताबिक परिवार पिछले करीब 15 दिनों से बच्चे का इलाज करा रहा है। उनका कहना है कि बीमारी से लड़ना एक चुनौती है, लेकिन अस्पताल की व्यवस्थाओं से जूझना उससे भी ज्यादा मुश्किल साबित हो रहा है।इंदौर अस्पताल लापरवाही को लेकर परिजनों का दावा है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं। लेकिन इंदौर अस्पताल लापरवाही की यह घटना यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मरीजों और उनके परिजनों को अब भी अपने दम पर संघर्ष करना पड़ रहा है?फिलहाल इस मामले को लेकर लोगों की नजर अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर बहस को जन्म दे सकती है।

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