Delhi Blast Updates! दिल्ली विस्फोट मामले में सबसे बड़ा खुलासा! दिवाली और 26 जनवरी पर थी बड़ी प्लानिंग, पढ़ें पूरा मामला

नई दिल्ली : दिल्ली ब्लास्ट की जांच कर रहे जांच एजेंसियों को अब तक का सबसे अहम सुराग मिला है — जिन दोनों संदिग्धों (डॉ. मुज़म्मिल और डॉ. उमर) को ब्लास्ट से जोड़ा जा रहा है, उन्होंने इस साल के जनवरी के पहले सप्ताह में लालकिले की रेकी की थी। यह ख़ास जानकारी मुज़म्मिल के फोन‑डंप और अन्य वायरल फुटेज‑इलेक्ट्रॉनिक सुरागों से मिली है। एजेंसियां कह रही हैं कि रेकी‑रिपोर्ट और लोकेशन‑डेटा उनकी साजिश की शुरुआती परतों को उजागर करते हैं।

वहीं पूछताछ में ये भी जांच एजेंसी को पता चला है कि, आगामी 26 जनवरी पर लाल किले को टारगेट करना इनकी प्लानिंग का हिस्सा था। ये दिवाली पर भी भीड़भाड़ वाली जगहों को निशाना बनाने की प्लानिंग कर रहे थे। इस बाबत जैश टेरर मॉड्यूल में गिरफ्तार मुजम्मिल की कार कई बार लाल किला के पास से गुजरी थी। मुजम्मिल के फोन का डंप डेटा खंगाला गया, जिसमें खुलासा हुआ कि मुजम्मिल कई बार लाल किले के पास भी गया था।

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अरुणा आसफ अली रोड और i20 की मौजूदगी
इतना ही नहीं इस जांच में यह भी सामने आया कि ब्लास्ट से पहले अरुणा आसफ अली रोड पर करीब 30–40 मिनट तक एक i20 कार खड़ी रही थी, जिसमें उमर अकेला बैठा नजर आया। CCTV और रूट‑मैपिंग से यह लोकेशन‑कड़ी भी मिल रही है। ऐसे फुटेज और पार्किंग‑रिपोर्ट्स की पड़ताल से पता चलता है कि संदिग्ध वाहन लंबी अवधि तक उस क्षेत्र में मौजूद रहा — जो जांच के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है।

फोन‑डेटा और ‘फोन बंद’ वाली पहेली
जांच में यह भी पाया गया कि उमर ने अपना फोन 31 अक्टूबर को स्विच‑ऑफ़ कर दिया था; उसकी अंतिम पिंग फरीदाबाद की एक यूनिवर्सिटी से दर्ज हुई। वहीं मुज़म्मिल के फोन‑डंप में कई बार लालकिले के आसपास उनकी मूवमेंट पाई गई। इस बात को लेकर दो संभावनाएँ उठ रही हैं — या तो पहले से ही योजना के तहत फोन छोड़ दिया गया था, या संदिग्धों ने अलग सिम/डिवाइस का इस्तेमाल किया, या फिर ब्लास्ट के समय फोन नष्ट कर दिया गया। एजेंसियाँ हर एंगल से इस पहेली को सुलझा रही हैं।

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विस्फोटक सामग्री — PETN का शक और अमोनियम नाइट्रेट
प्रारम्भिक तेज़ पड़ताल से अंदेशा है कि बम में केवल अमोनियम नाइट्रेट नहीं बल्कि पेंटाएरिथ्रिटॉल (PETN) जैसे शक्तिशाली रिएक्टिव केमिकल का भी इस्तेमाल हुआ हो सकता है। PETN तेज़ी से जलने वाला—और विनाशकारी प्रभाव देने वाला—एक तत्व है; यदि PETN का उपयोग सिद्ध हुआ तो विस्फोट की तीव्रता व फैलाव के कारण व्यापक नुकसान की व्याख्या होती है। शुरुआती रिपोर्ट्स में अमोनियम नाइट्रेट, PETN, फ्यूल‑ऑयल और डेटोनेटर की मौजूदगी का शक जताया जा रहा है और फोरेंसिक टीम इन नमूनों की त्वरित लैब‑पड़ताल कर रही है।

जांच की व्यापकता से यह भी संकेत मिले हैं कि यह एक एकल‑घटना न होकर किसी बड़े मॉड्यूल का हिस्सा हो सकता है। फरीदाबाद में हुई छापेमारी और उसमें बरामद बड़ी मात्रा में विस्फोटक/सामग्री के बाद यह शक और पुख्ता हुआ कि संदिग्ध दल का दायरा कई राज्यों में फैला हुआ था। जांच में लगे केंद्रीय और राज्य‑स्तरीय एजेन्सियाँ अब इस नेटवर्क की हड्डियाँ‑मांस काटकर जोड़ने में जुटी हैं।

आगे की राह — क्या मिलने की उम्मीद
मामले पर जांच अधिकारियों का कहना है कि, मुज़म्मिल‑उमर के फोन‑डंप, पार्किंग‑CCTV, पेट्रोल पंप व रूट‑फुटेज और फोरेंसिक रिपोर्टें मिलकर धमाके के पीछे की साजिश के ठोस तार पेश करेंगी। जांच अभी भी तीव्र गति से चल रही है और किसी भी नई जानकारी के साथ सुरक्षा‑प्रोटोकॉल व आम नागरिकों को सूचित किया जा रहा है।

 

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