भोपाल : मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (MPMRC) में अचानक हुई छंटनी ने कर्मचारियों और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब तक कुल 9 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, जबकि करीब डेढ़ दर्जन कर्मचारी अभी भी प्रबंधन के रडार पर बताए जा रहे हैं। बिना स्पष्ट कारण बताए कर्मचारियों को बाहर किए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
बिना नोटिस सेवाएं समाप्त, उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, उन्हें न तो कोई कारण बताया गया और न ही पूर्व सूचना दी गई। इससे मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े कर्मचारियों में असुरक्षा का माहौल बन गया है। अचानक लिए गए इस फैसले को लेकर संगठन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
दिल्ली मेट्रो से आए कर्मचारियों की वापसी
छंटनी की प्रक्रिया के तहत दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) से प्रतिनियुक्ति पर आए छह कर्मचारियों को उनके मूल विभाग वापस भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय प्रशासनिक समीक्षा के बाद लिया गया, हालांकि इसकी आधिकारिक वजह अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
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‘सर्जरी’ या फर्जी नियुक्तियों की जांच?
MPMRC में चल रही इस कार्रवाई को लेकर दो तरह की चर्चाएं हैं। एक ओर इसे संगठनात्मक ‘सर्जरी’ बताया जा रहा है, ताकि गैर-जरूरी या प्रदर्शनहीन कर्मचारियों को हटाया जा सके। वहीं दूसरी ओर, फर्जी या नियमों के खिलाफ हुई नियुक्तियों की आशंका भी जताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मेट्रो प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर्ट पहुंचे हटाए गए कर्मचारी
सेवाएं समाप्त किए जाने से नाराज कुछ कर्मचारियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका आरोप है कि बिना कारण और बिना सुनवाई के उन्हें हटाया गया, जो श्रम कानूनों और सेवा शर्तों के खिलाफ है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी रूप से और गंभीर हो सकता है।
प्रबंधन की चुप्पी बरकरार
फिलहाल MPMRC प्रबंधन की ओर से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से छंटनी का सिलसिला शुरू हुआ है, उससे यह साफ है कि मेट्रो कॉरपोरेशन में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव हो सकते हैं।











