IPS Shailja Das Biography: बिहार में NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आए एक वीडियो ने 2022 बैच की IPS अधिकारी शैलजा दास को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। वायरल वीडियो में वह तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिसकर्मियों को संयम बरतने की सलाह देती हुई नजर आती हैं। उनका कहना था, “फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन है। जिसको जो बोलना है, बोले। जब तक वे हम पर बल प्रयोग नहीं करेंगे, हम उन पर बल प्रयोग नहीं करेंगे।” उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है और कई यूजर्स उन्हें ‘Gen Z लेडी सिंघम’ कह रहे हैं।
IPS शैलजा दास बिहार के सहरसा जिले के कायस्थ टोला की रहने वाली हैं। उनका जन्म 7 नवंबर 1997 को हुआ। उनके पिता डॉ. अजय दास पेशे से डॉक्टर हैं, जबकि माता अर्चना दास हैं। परिवार में शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी गई, जिसका असर उनकी पढ़ाई और करियर में साफ दिखाई देता है।
स्कूल से कॉलेज तक शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड
शैलजा दास ने अपनी शुरुआती शिक्षा बुधा पब्लिक स्कूल, सहरसा से पूरी की। वर्ष 2013 में उन्होंने प्रथम श्रेणी से 10वीं उत्तीर्ण की। इसके बाद वह दिल्ली चली गईं और दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), आर.के. पुरम से 12वीं की परीक्षा में 96.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। आगे उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
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23 साल की उम्र में UPSC में हासिल की 83वीं रैंक
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद शैलजा दास ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2020 में पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचीं। इसके बाद UPSC 2021 में उन्होंने ऑल इंडिया 83वीं रैंक हासिल की। महज 23 वर्ष की उम्र में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित होकर उन्हें बिहार कैडर मिला।
लालगंज थाना से पटना सिटी SP तक का सफर
प्रशिक्षण के दौरान शैलजा दास ने वैशाली जिले के लालगंज थाने में प्रभारी के रूप में काम किया। इसके बाद नालंदा के हिलसा अनुमंडल में SDPO के पद पर तैनात रहीं। वर्तमान में वह पटना (पूर्वी) की सिटी एसपी के रूप में कार्यरत हैं और अपनी अनुशासित तथा संवेदनशील कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों हो रही तारीफ?
वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों के बीच शांति बनाए रखने और पुलिसकर्मियों को धैर्य रखने की सलाह देने के बाद शैलजा दास की कार्यशैली की सोशल मीडिया पर खूब सराहना हो रही है। कई लोगों ने उनके व्यवहार को लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बताया है। हालांकि, किसी वायरल वीडियो के आधार पर किसी अधिकारी के पूरे कार्यकाल का आकलन नहीं किया जा सकता, लेकिन इस घटना ने उन्हें चर्चा के केंद्र में जरूर ला दिया है।







