Hemant Malviya SC judgment : सुप्रीम कोर्ट से कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को गिरफ्तारी से राहत, सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदार अभिव्यक्ति पर जताई चिंता

Hemant Malviya SC judgment : नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने विवादित कार्टून और पोस्ट साझा करने के मामले में कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए साफ किया है कि सोशल मीडिया पर बोलने की आज़ादी की सीमाएं तय होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: “स्वतंत्रता की सीमा होनी चाहिए”

जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा,
“सोशल मीडिया पर हर कोई किसी के बारे में कुछ भी कह देता है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा है। इसे नियंत्रित करने की ज़रूरत है।”

कोर्ट ने हेमंत मालवीय को फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी है, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यदि उन्होंने आपत्तिजनक पोस्ट जारी रखी, तो राज्य कानून के तहत उन पर कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है पूरा मामला?

हेमंत मालवीय पर आरोप है कि उन्होंने 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), भगवान शिव और हिंदू प्रतीकों को लेकर आपत्तिजनक कार्टून और टिप्पणियां पोस्ट की थीं।

इन पोस्टों को लेकर संघ समर्थक अधिवक्ता विनय जोशी ने मई 2024 में इंदौर के लसूड़िया थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि मालवीय की पोस्ट्स ने हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाई और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की।

किन धाराओं में केस दर्ज हुआ?

एफआईआर में हेमंत मालवीय के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और आईटी एक्ट की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • धार्मिक भावना आहत करना
  • सांप्रदायिक तनाव फैलाना
  • इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करना

हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

मालवीय ने अग्रिम जमानत के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

वृंदा ग्रोवर ने कहा: “अरुचिकर हो सकता है, अपराध नहीं”

सुप्रीम कोर्ट में मालवीय की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा:
“यह मामला अरुचिकर हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहीं है। यह एक अभिव्यक्ति हो सकती है जिससे लोग असहमत हों, लेकिन इससे जेल भेजने की आवश्यकता नहीं बनती।”

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