America-Iran Tension: अमेरिका-ईरान तनाव एक बार फिर दुनिया की चिंता का कारण बन गया है। शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर करीब एक घंटे तक कार्रवाई की। अमेरिकी सेना ने मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ तटीय रडार साइट्स को निशाना बनाया। इस कार्रवाई के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हालात पर नजर रखी जा रही है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने पहले सीजफायर का उल्लंघन किया था। उनके मुताबिक इसी कारण जवाबी कार्रवाई की गई। अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई।
होर्मुज स्ट्रेट की घटना बनी बड़ी वजह
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने की एक बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट में हुई घटना को बताया जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार 25 जून को सिंगापुर के कार्गो जहाज एमवी एवर लवली पर ड्रोन हमला हुआ था। अमेरिका का दावा है कि इस घटना के बाद सुरक्षा हालात और गंभीर हो गए।
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ईरान ने भी किया पलटवार का दावा
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने दावा किया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
अमेरिका-ईरान तनाव पर ईरान की संसद के सदस्य इब्राहिम अजीजी ने कहा कि बातचीत के दौरान हमला करना युद्धविराम की भावना के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस कदम का असर आगे की बातचीत पर भी पड़ सकता है।
NATO देशों पर भी उठाए सवाल
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ईरान ने NATO देशों पर भी सवाल उठाए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जिन देशों ने अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई का समर्थन किया, उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। इस बयान के बाद कई देशों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
होर्मुज, लेबनान और परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ी हलचल
अमेरिका-ईरान तनाव का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट में एक मालवाहक जहाज पर हमले के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं लेबनान में भी तनाव बढ़ा हुआ है। दूसरी ओर IAEA ने कहा है कि उसकी टीम जल्द ही ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करेगी।
बातचीत भी जारी, लेकिन तनाव कम नहीं
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक राहत की खबर भी सामने आई है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत हुई है। जानकारी के अनुसार चार संयुक्त कमेटियां बनाने और अगले 60 दिनों में समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी है। रूस ने भी संभावित समझौते का समर्थन करने की बात कही है।
तेल बाजार और दुनिया की नजर हालात पर
अमेरिका-ईरान तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक सुरक्षा को लेकर कई देश लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।







