Tuesday, September 8, 2026
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Honey Singh Indore Concert Entertainment Tax Dispute: हनी सिंह के इंदौर कॉन्सर्ट केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, याचिका वापसी का आदेश रद्द, दोबारा होगी सुनवाई

इंदौर [Nishanebaaz News]Honey Singh Indore Concert Entertainment Tax Dispute। मशहूर रैपर और गायक यो यो हनी सिंह के इंदौर कॉन्सर्ट से जुड़ा मनोरंजन कर (Entertainment Tax) विवाद एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंस गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने मामले में 17 नवंबर 2025 को दिए गए उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसके तहत आयोजकों की याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने पुरानी याचिका को फिर से बहाल कर दिया है। अब इस पूरे विवाद पर मनोरंजन कर की वास्तविक गणना और आयोजकों की ओर से दिए गए अंडरटेकिंग (लिखित आश्वासन) के आधार पर मेरिट के तहत दोबारा सुनवाई होगी।

यह पूरा मामला इंदौर में आयोजित हनी सिंह के एक भव्य कॉन्सर्ट के बाद इंदौर नगर निगम और कार्यक्रम आयोजकों के बीच शुरू हुए कर विवाद से जुड़ा है। नगर निगम ने 8 मार्च 2025 को आयोजकों से 50 लाख रुपये मनोरंजन कर जमा कराने का नोटिस दिया था। जब तय राशि जमा नहीं की गई, तो निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए कॉन्सर्ट में इस्तेमाल किए गए साउंड सिस्टम को जब्त कर लिया था। इसके खिलाफ आयोजकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से उन्हें अंतरिम राहत मिली थी।

सुनवाई के दौरान नगर निगम का तर्क था कि आयोजकों ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा तैयार ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर टैक्स भरने का अंडरटेकिंग दिया था, जिसमें 3 करोड़ 52 लाख 61 हजार 923 रुपये की आय पर टैक्स निर्धारित किया जाना था। दूसरी ओर, आयोजकों ने टैक्स गणना को चुनौती देते हुए कहा था कि जीएसटी पोर्टल पर दिख रही 3.28 करोड़ रुपये की राशि देशभर के 10 अलग-अलग कार्यक्रमों की थी। आयोजकों का दावा है कि इंदौर में वास्तविक टिकट बिक्री केवल 78 लाख 47 हजार 637 रुपये की हुई थी, जिस पर 10% की दर से केवल ₹7.84 लाख का टैक्स बनता है।

बाद में आयोजकों ने अपनी याचिका वापस ले ली थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। हालांकि, अब हाईकोर्ट ने रुख कड़ा करते हुए माना कि अंतरिम राहत लेते समय आयोजकों द्वारा दिए गए आश्वासनों और देनदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट यह जांच करेगा कि क्या आयोजकों ने अपने लिखित आश्वासन का पालन किया था या नहीं। याचिका बहाल होने के बाद अब इंदौर नगर निगम और आयोजकों के बीच टैक्स के वास्तविक आंकड़ों को लेकर न्यायालय में बहस नए सिरे से शुरू होगी।

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