Cockroach Is Back: इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का एक डिजिटल आंदोलन और इसके सूत्रधार अभिजीत दीपके अचानक जबरदस्त सुर्खियों में आ गए हैं। इस हैंडल पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगने के महज कुछ ही घंटों के भीतर ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से नए हैंडल की वापसी ने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। इस राजनैतिक और डिजिटल हलचल के बीच अचानक समूचे देश में कॉकरोच (तिलचट्टा) को लेकर कौतूहल और चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमूमन हर घर के रसोईघर या अंधेरे कोनों में दिखने वाला यह मामूली सा कीट वास्तव में आधुनिक विज्ञान के लिए भी एक बड़ा रहस्य है। अपनी बेजोड़ शारीरिक संरचना, परमाणु रेडिएशन को झेलने की शक्ति और बिना सिर के हफ्तों जीवित रहने की क्षमता के कारण इसे ‘अमर जीव’ की संज्ञा दी जाती है।
जर्मन प्रजाति का महा-प्रजनन चक्र: 200 दिन की जिंदगी और 400 बच्चों की फौज
कीट विज्ञानियों के अनुसार, दुनिया भर में पाई जाने वाली कॉकरोच की प्रजातियों में सबसे खतरनाक और तेजी से अपनी आबादी बढ़ाने वाली प्रजाति ‘जर्मन कॉकरोच’ है। इस प्रजाति की जैविक क्षमता इंसानों को हैरत में डाल देती है।
-
अंडों का कैप्सूल (ऊथेका): एक वयस्क मादा जर्मन कॉकरोच का पूरा जीवनकाल महज 100 से 200 दिनों का होता है। परंतु, इस संक्षिप्त अवधि में भी वह 200 से लेकर 400 तक बच्चों को जन्म देने की क्षमता रखती है। यह मादा अपने जीवन चक्र में 4 से 8 विशेष कैप्सूल तैयार करती है, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में ‘ऊथेका’ (Ootheca) कहा जाता है।
-
28 दिनों में फौज तैयार: इस जीव के सिर्फ एक ऊथेका कैप्सूल के भीतर 30 से 40 अंडे अत्यंत सुरक्षित स्थिति में रहते हैं। जर्मन कॉकरोच के ये अंडे महज 28 दिनों के भीतर ही फूट जाते हैं और इनमें से निकलने वाले नन्हे बच्चे बहुत कम समय में वयस्क होकर खुद भी नए बच्चे पैदा करने योग्य हो जाते हैं। यही कारण है कि घर में यदि एक भी मादा कॉकरोच छिप जाए, तो देखते ही देखते वहां इनका पूरा साम्राज्य स्थापित हो जाता है।

अमेरिकन और ओरिएंटल प्रजातियों का जीवन चक्र
जर्मन प्रजाति के अलावा इंसानी बस्तियों के आसपास अमेरिकन और ओरिएंटल कॉकरोच भी बहुतायत में पाए जाते हैं।
-
अमेरिकन कॉकरोच: इनका जीवनकाल थोड़ा लंबा यानी लगभग एक वर्ष का होता है। ये अपने पूरे जीवन चक्र में करीब 150 से 200 बच्चों को जन्म देते हैं।
-
ओरिएंटल कॉकरोच: गंदगी और अत्यधिक नमी वाले नालों व कोनों में मिलने वाले ओरिएंटल कॉकरोच औसतन 180 दिनों तक जीवित रहते हैं। प्रजनन के मामले में यह प्रजाति थोड़ी धीमी है, जो अपनी पूरी जिंदगी में लगभग 125 से 130 बच्चों का कुनबा ही तैयार कर पाती है।
तंत्रिका तंत्र का अनूठा जाल: सिर कटने पर भी क्यों नहीं मरता कॉकरोच?
इंसानों या अन्य रीढ़धारी जानवरों के विपरीत, कॉकरोच का नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) केवल उसके मस्तिष्क या सिर के भीतर सीमित नहीं रहता। कॉकरोच का तंत्रिका तंत्र उसके पूरे शरीर में एक जटिल जाल की तरह फैला होता है। इसी अनूठी शारीरिक बनावट के कारण यदि कभी किसी हादसे या हमले में कॉकरोच का सिर धड़ से पूरी तरह अलग भी हो जाए, तो भी उसका बाकी का धड़ और पैर सामान्य रूप से काम करते रहते हैं। सिर कटने के बाद भी वह एक से दो हफ्ते तक बिना किसी परेशानी के आसानी से जमीन पर चल-फिर और दौड़ सकता है।
‘स्पिरैकल्स’ से श्वसन क्रिया: मुंह और नाक पर निर्भरता नहीं
इंसान बिना सिर के तुरंत दम तोड़ देता है क्योंकि उसकी सांस बंद हो जाती है, लेकिन कॉकरोच के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह जीव सांस लेने के लिए अपने मुंह या नाक पर रत्ती भर भी निर्भर नहीं करता है।
विज्ञान का अनोखा नियम: कॉकरोच के पूरे शरीर की त्वचा पर छोटे-छोटे बारीक छिद्र होते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में ‘स्पिरैकल्स’ (Spiracles) कहा जाता है। इन्हीं सूक्ष्म छेदों के जरिए हवा सीधे उसके आंतरिक अंगों तक पहुंचती है और रक्त का शुद्धिकरण करती है। सिर न होने पर भी उसकी श्वसन क्रिया बाधित नहीं होती। सिर कटने के बाद कॉकरोच सांस की कमी से नहीं, बल्कि मुंह न होने के कारण अंत में केवल ‘भूख और प्यास’ की वजह से दम तोड़ता है।
900 गुना भारी दबाव और परमाणु रेडिएशन भी बेअसर: संसाधनों की न्यूनतम जरूरत
कॉकरोच ठंडे खून वाले यानी ‘कोल्ड-ब्लडेड’ (Cold-Blooded) जीवों की श्रेणी में आते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि इन्हें अपने शरीर का आंतरिक तापमान स्थिर बनाए रखने के लिए इंसानों की तरह बार-बार भोजन करने या बहुत ज्यादा कैलोरी (ऊर्जा) पैदा करने की आवश्यकता नहीं होती।
-
भूख-प्यास सहने की पराकाष्ठा: यह जीव बेहद कम संसाधनों में विषम से विषम परिस्थितियों में खुद को बचाए रख सकता है। एक कॉकरोच बिना पानी पिए आराम से एक हफ्ते तक जिंदा रह सकता है, जबकि अगर उसे एक महीने तक खाना न मिले, तो भी वह बिना किसी दिक्कत के सक्रिय रह सकता है।
-
अद्भुत सहनशक्ति: जैव-भौतिकी के अध्ययनों में पाया गया है कि कॉकरोच अपने कुल वजन से लगभग 900 गुना तक ज्यादा का भारी दबाव आसानी से झेल सकता है। इसके अलावा, इसकी कोशिकीय संरचना ऐसी होती है कि यह विनाशकारी परमाणु रेडिएशन (Nuclear Radiation) के प्रभाव को भी बेअसर कर जीवित बच निकलने की अद्भुत क्षमता रखता है। इन्हीं सब अकल्पनीय वैज्ञानिक कारणों से इसे कलयुग का ‘अमर जीव’ कहा जाता है।









