Khandwa Protest: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में रविवार को जंगलों की सुरक्षा और वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर कोरकू समाज का विशाल प्रदर्शन देखने को मिला। खंडवा और बुरहानपुर जिले से आए करीब 5 हजार से अधिक आदिवासी, वन सुरक्षा समिति के सदस्य और ग्रामीण एकजुट होकर सड़कों पर उतरे और जंगलों को बचाने के लिए जोरदार आवाज बुलंद की।
स्टेडियम ग्राउंड से निकली विशाल रैली में शामिल लोगों ने “जंगल है तो जीवन है”, “तीर-गोफन खाएंगे, जंगल हम बचाएंगे” और “वन बचाओ, भविष्य बचाओ” जैसे नारों के साथ वन संरक्षण का संदेश दिया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह को ज्ञापन सौंपकर जंगलों से अतिक्रमण हटाने और वन संरक्षण के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
आमाखुजरी के जंगलों को बचाने की उठी आवाज
Khandwa Protest: प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा आमाखुजरी और आसपास के वन क्षेत्रों में कथित अवैध अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई रहा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लगातार हो रहे अतिक्रमण और जंगलों की कटाई से वन क्षेत्र तेजी से सिमट रहे हैं, जिससे आदिवासी समाज की आजीविका, पारंपरिक अधिकार और प्राकृतिक संसाधन खतरे में पड़ गए हैं।
कोरकू समाज के लोगों ने कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, पहचान, परंपरा और जीवन का आधार हैं। यदि जंगल नहीं बचेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा।
वन विभाग की कार्रवाई का किया समर्थन
Khandwa Protest: कोरकू समाज ने ज्ञापन के माध्यम से भिलायीखेड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान का खुलकर समर्थन किया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और आदिवासी हितों के लिए आवश्यक है तथा इसे बिना किसी दबाव के लगातार जारी रखा जाना चाहिए।प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि वन भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो और भविष्य में किसी भी प्रकार का नया अतिक्रमण न होने दिया जाए।
‘जंगल हमारे जीवन और संस्कृति का आधार’
Khandwa Protest: खालवा विकासखंड के ग्राम ताल्याधड़ निवासी धारासिंह ने कहा कि लगातार बढ़ते अवैध अतिक्रमण के कारण जंगलों का क्षेत्रफल कम होता जा रहा है। इससे वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं और आदिवासी समाज के पारंपरिक निस्तार अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं समाज के प्रतिनिधि मानक लाल ने कहा कि कोरकू समाज का अस्तित्व सदियों से जंगलों से जुड़ा रहा है। जंगलों से ही उन्हें जलाऊ लकड़ी, महुआ, चिरौंजी, गोंद, तेंदूपत्ता, औषधीय वन उपज, पशुओं के लिए चारा और अन्य लघु वनोपज प्राप्त होती हैं। यही संसाधन उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार हैं।
सरकार से रखीं कई महत्वपूर्ण मांगें
ज्ञापन में कोरकू समाज ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से—
- खंडवा और बुरहानपुर की समस्त वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रखी जाए।
- अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि पर दोबारा कब्जा रोकने के लिए पौधरोपण, चौकी, ट्रेंच, वॉच टावर और नियमित गश्त की व्यवस्था की जाए।
- वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
- वन कर्मचारियों पर हमला करने, शासकीय कार्य में बाधा डालने और वन अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- वन संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों और सहयोगी ग्रामीणों को सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जाए।
- पूरे प्रदेश में वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए विशेष राज्य स्तरीय अभियान चलाया जाए।
पुलिस रही मुस्तैद, शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन
Khandwa Protest: हजारों लोगों की मौजूदगी को देखते हुए प्रदर्शन स्थल और रैली मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन की निगरानी में पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।प्रदर्शन के अंत में कोरकू समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जंगलों की रक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार, प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी है। यदि समय रहते जंगलों को नहीं बचाया गया, तो पर्यावरण के साथ-साथ आदिवासी समाज का अस्तित्व भी गंभीर संकट में पड़ सकता है।







