Chhattisgarh PWD corruption: छत्तीसगढ़ में सरकारी निर्माण पर सवाल: PWD के अधिकारी भ्रष्टाचार की चाशनी में डूबे?, कहीं टेंडर घोटाला, कहीं पुल गिरा, कहीं पहली बारिश में बह गई सड़कें, पढ़िए कौन-कौन जिम्मेदार

Chhattisgarh PWD corruption:रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राजधानी रायपुर में 50 लाख रुपए के टेंडर पर नियमों की अनदेखी के आरोप हैं। मुंगेली में 4.50 करोड़ रुपए का पुल पहली ढलाई में ही ढह गया। कवर्धा में 2.50 करोड़ की सड़क चार महीने भी नहीं टिक सकी। राजनांदगांव में 26 करोड़ के ओवरब्रिज में लोकार्पण के एक महीने बाद दरारें पड़ गईं। वहीं लगातार बारिश ने कई जिलों में पुल-पुलियों की कमजोर स्थिति उजागर कर दी है। सवाल यह है कि क्या सरकारी निर्माण में गुणवत्ता से समझौता हो रहा है?

Chhattisgarh PWD corruption: रायपुर का 50 लाख का टेंडर विवाद

 

रायपुर में लोक निर्माण विभाग के 50 लाख रुपए के एक टेंडर पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि श्रीजी इलेक्ट्रिकल्स नाम की फर्म को नियमों के विपरीत पात्र घोषित किया गया।

नोटशीट में लिखा गया कि फर्म ने उद्यम रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जमा किया था, जिसके आधार पर उसे इलेक्ट्रिकल लाइसेंस और अन्य जरूरी रजिस्ट्रेशन से छूट देकर योग्य माना गया। लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि टेंडर दस्तावेजों में ऐसा कोई प्रमाणपत्र मौजूद ही नहीं है।

यदि यह आरोप सही साबित होता है तो नियमानुसार फर्म को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए था। इसके बावजूद करीब 50 लाख रुपए का काम उसी कंपनी को दिए जाने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।

Chhattisgarh PWD corruption:मुंगेली का 4.50 करोड़ का पुल पहली ढलाई में गिरा

मुंगेली जिले के अमर टापू धाम में करीब साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत से बन रहा पुल पहली ही स्लैब ढलाई में भरभराकर गिर गया। घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता और विभागीय निगरानी दोनों पर सवाल खड़े हो गए।

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और तकनीकी मानकों का पालन नहीं हुआ। कांग्रेस ने इसे भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का नतीजा बताया है। हालांकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव का कहना है कि यह गुणवत्ता नहीं बल्कि तकनीकी चूक का मामला है और जांच के बाद कार्रवाई होगी।

 

इसी मामले में यह आरोप भी सामने आए हैं कि पुल का टेंडर करीब दो साल तक लंबित रखा गया और बाद में संशोधित लागत के साथ उसी ठेकेदार को कार्यादेश दिया गया। मिट्टी भराई और रॉयल्टी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

Chhattisgarh PWD corruption:कवर्धा में चार महीने में धंस गई 2.50 करोड़ की सड़क

कबीरधाम जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 2.50 करोड़ रुपए की लागत से बनी सड़क पहली ही बारिश में धंस गई। यह सड़क मार्च 2026 में तैयार हुई थी और जुलाई आते-आते इसकी परत उखड़ने लगी।

बोड़ला ब्लॉक में पुलिया के पास एक हाईवा फंस गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने सड़क की परत हाथ से उखाड़कर वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होने के बाद राज्य स्तरीय जांच टीम मौके पर पहुंची।

जांच में शुरुआती स्तर पर गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने के बाद सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे. रितेश नायडू को निलंबित कर दिया गया। कार्यपालन अभियंता के निलंबन का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

Chhattisgarh PWD corruption:राजनांदगांव का 26 करोड़ का ओवरब्रिज भी सवालों में

 

राजनांदगांव जिले के बरगा गांव में रेलवे द्वारा करीब 26 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए ओवरब्रिज में लोकार्पण के महज एक महीने बाद दरारें दिखाई देने लगीं।

पहली ही बारिश के बाद सड़क कई जगहों से फट गई और पुल पर गड्ढे बन गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण में भारी लापरवाही हुई है और पुल कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

मामला सामने आने के बाद ठेकेदार ने मरम्मत शुरू कर दी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि केवल लीपापोती की जा रही है। लोगों ने पुल की स्वतंत्र तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

ठेकेदार का कहना है कि बारिश का पानी अंदर जाने से कैविटी बनी है। बारिश खत्म होने के बाद सड़क को दोबारा खोदकर स्थायी मरम्मत की जाएगी।

Chhattisgarh PWD corruption:बारिश ने खोली पुल-पुलियों की पोल

लगातार बारिश ने प्रदेश के कई जिलों में पुल-पुलियों की वास्तविक स्थिति सामने ला दी है। गरियाबंद जिले में कोसुमबूड़ा पुल तेज बहाव में टूट गया, जिससे दस से अधिक गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया। ग्रामीणों को अस्पताल, स्कूल, बैंक और बाजार तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है।

सूरजपुर जिले के सुखदेवपुर नाला में अधूरी पुलिया और रपटा के कारण स्कूली बच्चों, महिलाओं और किसानों को हर दिन जान जोखिम में डालकर उफनता नाला पार करना पड़ रहा है। कई जगह परिजन बच्चों को कंधे पर बैठाकर स्कूल पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण लंबे समय से स्थायी पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

 

Chhattisgarh PWD corruption: रायपुर में टेंडर प्रक्रिया पर सवाल… मुंगेली में निर्माणाधीन पुल का गिरना… कवर्धा में चार महीने में धंस गई सड़क… राजनांदगांव के नए ओवरब्रिज में दरारें… और बारिश में टूटते पुल-पुलिए…ये घटनाएं अलग-अलग जिलों की जरूर हैं, लेकिन एक सवाल सभी जगह समान है—क्या सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और निगरानी से समझौता हो रहा है? अब लोगों की नजर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और सरकार की कार्रवाई पर है। यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो करोड़ों रुपए की परियोजनाएं और आम लोगों की सुरक्षा दोनों पर सवाल लगातार उठते रहेंगे।

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