Tuesday, August 25, 2026
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CBI Chargesheet in Mahadev App: छत्तीसगढ़ से शुरू हुए महादेव ऐप घोटाले में ईडी के बाद सीबीआई का बड़ा कदम, भगोड़ा घोषित करने की तैयारी

CBI Chargesheet in Mahadev App: नई दिल्ली/रायपुर: देश के सबसे चर्चित और बड़े डिजिटल घोटालों में शामिल महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच को और तेज कर दिया है। जांच एजेंसी ने अदालत में छह नई चार्जशीट दाखिल की हैं। इस बहुचर्चित मामले में सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की है।

इन मुख्य आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुआ आरोपपत्र

सीबीआई द्वारा अदालत में पेश की गई चार्जशीट में छह प्रमुख व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इसमें आशीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धममानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा का नाम शामिल है। इसके अलावा, जांच एजेंसी ने नेटवर्क के मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी अतिरिक्त और पुख्ता सबूत अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।

पूरक चार्जशीट का ब्योरा: एजेंसी ने पांच और पूरक (Supplementary) चार्जशीट दाखिल की हैं, जिनमें कुल 66 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े प्रमुख सदस्य शामिल हैं। आरोपियों पर आईपीसी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।

सोशल मीडिया और म्यूल अकाउंट्स से फैलाया नेटवर्क

सीबीआई की जांच में यह बात उजागर हुई है कि महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर देशभर में अवैध सट्टेबाजी का एक विशाल तंत्र तैयार किया था।

  • बेटिंग पैनल का संचालन: देश के अलग-अलग राज्यों में अवैध बेटिंग पैनल चलाए जाते थे, जहां आम लोगों से ऑनलाइन दांव लगवाए जाते थे।

  • अवैध कमाई को छुपाने की कोशिश: सट्टेबाजी से अर्जित करोड़ों रुपये के काले धन को छुपाने के लिए कई फर्जी व म्यूल (Mule) बैंक खातों का उपयोग किया गया।

  • विदेशों में फंड ट्रांसफर: इस धन को कई स्तरों पर घुमाकर (Layering) विदेशों में भेजने की कोशिश की गई, जिसकी वित्तीय पड़ताल सीबीआई कर रही है।

संरक्षण राशि और भ्रष्टाचार का एंगल

इस मामले में केवल सट्टेबाजी ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के भी सबूत मिले हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अवैध बेटिंग सिंडिकेट को सुचारू रूप से चलाने के लिए कमाई का एक बड़ा हिस्सा प्रभावशाली लोगों, प्रशासनिक अधिकारियों और बिचौलियों तक “संरक्षण राशि” (Protection Money) के रूप में पहुंचाया जाता था। यही कारण है कि मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं विशेष रूप से जोड़ी गई हैं।

भगोड़ा घोषित करने और रेड कॉर्नर नोटिस की तैयारी

मामले के मुख्य सूत्रधार सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल कई साल पहले ही भारत छोड़कर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) भाग चुके हैं और वहीं से इस पूरे काले कारोबार को संचालित कर रहे थे।

सीबीआई ने चार प्रमुख फरार आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस (Red Corner Notice) जारी करवाया है। इसके अलावा, भारत में स्थित उनकी बेनामी संपत्तियों को जब्त करने के उद्देश्य से उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी (Fugitive Economic Offender) घोषित कराने की कानूनी प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

ईडी के बाद सीबीआई की बहुआयामी जांच जारी

उल्लेखनीय है कि महादेव ऐप का मामला सबसे पहले छत्तीसगढ़ में राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारों में गूंजा था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत छापेमारी और गिरफ्तारियां की थीं। अब सीबीआई इस मामले में डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में नए तथ्य सामने आने पर अतिरिक्त पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं।

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