Raigarh District Crime News: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़/घरघोड़ा: रायगढ़ जिले के घरघोड़ा स्थित अपर सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाते हुए हत्या के दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमान अभिषेक शर्मा की अदालत ने मृतक विशेश्वर राठिया की हत्या के मामले में आरोपी टीका राम उर्फ बन सागर राठिया और सहोद्रा राठिया को दोषी पाया। अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास के साथ-साथ ₹1000-₹1000 के अर्थदंड से भी दंडित करने का आदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 12 फरवरी 2020 को हुई थी, जब मृतक के भाई विन्देश्वर राठिया ने थाना धरमजयगढ़ में अपने भाई की संदिग्ध स्थिति में मौत की रिपोर्ट दर्ज कराई।
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घटना की रात: मृतक विशेश्वर राठिया अपने गांव बायसी लाख पतरा स्थित पुराने मकान में अपनी पत्नी (आरोपिया सहोद्रा राठिया) और बच्चे के साथ सोने गया था। उसी रात उनका मौसेरा भाई आरोपी टीका राम उर्फ बन सागर राठिया (निवासी ग्राम गेरसा) शादी का कार्ड देने के बहाने आया था और वह भी उसी पुराने मकान में ठहरा था।
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झूठी कहानी गढ़ी: देर रात लगभग 2:30 बजे आरोपिया सहोद्रा राठिया ने नए मकान में जाकर परिजनों को बताया कि उसका पति बाहर कहीं से गिरकर घायल हो गया है। जब परिजनों ने जाकर देखा, तो विशेश्वर के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और खून बह रहा था।
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अस्पताल में मौत: घायल विशेश्वर को तत्काल धरमजयगढ़ अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान सुबह लगभग 5 बजे उसने दम तोड़ दिया।
पोस्ट मार्टम और पुलिस विवेचना से खुला राज
चिकित्सकों की टीम द्वारा किए गए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि विशेश्वर की मृत्यु दुर्घटना से नहीं बल्कि यह एक हत्या (Homicidal Death) थी। इसके बाद धरमजयगढ़ पुलिस ने अपराध क्रमांक 20/2020 धारा 302 के तहत अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।
तत्कालीन थाना प्रभारी/निरीक्षक अमित शुक्ला के नेतृत्व में की गई गहन विवेचना के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी टीका राम और आरोपिया सहोद्रा राठिया के बीच अवैध संबंध थे।
हत्या की वजह: मृतक विशेश्वर को दोनों के इस अनैतिक संबंध की जानकारी हो चुकी थी। अपने इस राज को छिपाने और रास्ते से हटाने की नीयत से घटना वाली रात दोनों आरोपियों ने मिलकर सोए हुए विशेश्वर के सिर पर ईंट और सिल-लोढ़े से प्राणघातक हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
अदालत का फैसला और क्षतिपूर्ति की अनुशंसा
विवेचना पूर्ण होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने पुख्ता साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने और साक्षियों के बयानों का अनुशीलन करने के बाद दोनों आरोपियों को भादंवि की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
इसके अतिरिक्त, विद्वान न्यायालय ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मृतक के आश्रित परिजनों को विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किए जाने की विशेष अनुशंसा भी की है।







