Sunday, August 23, 2026
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OTT से हटने के बाद ‘सतलुज’ पर नया बवाल! अब पंजाब के हर गांव में दिखाई जाएगी विवादित फिल्म

Satluj Film Controversy: सतलुज फिल्म विवाद एक बार फिर पंजाब की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। OTT प्लेटफॉर्म से फिल्म हटाए जाने के बाद अब शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने बड़ा फैसला लिया है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने घोषणा की है कि सतलुज फिल्म विवाद से जुड़ी इस फिल्म को पंजाब के हर गांव और हर इलाके में लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इस ऐलान के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।

सतलुज फिल्म विवाद के बीच सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि इतिहास से जुड़ी घटनाओं को सामने लाने का प्रयास है। उनके अनुसार पार्टी गांवों, गुरुद्वारों और सार्वजनिक स्थानों पर फिल्म की स्क्रीनिंग करेगी ताकि नई पीढ़ी उस दौर के बारे में जान सके, जिसे लेकर आज भी चर्चा होती है।

OTT से हटने के बाद बढ़ा विवाद
सतलुज फिल्म विवाद तब और गहरा गया जब फिल्म 3 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज होने के कुछ समय बाद हटा दी गई। फिल्म पहले “पंजाब ’95” नाम से चर्चा में थी। इसके हटने के बाद कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने अलग-अलग स्थानों पर इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग शुरू कर दी। अब अकाली दल के ऐलान ने इस बहस को और बड़ा बना दिया है।

फिल्म किस कहानी पर आधारित है?
सतलुज फिल्म विवाद की वजह बनी यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित बताई जाती है। फिल्म में उन घटनाओं को दिखाया गया है, जिनकी जांच खालरा ने अपने जीवनकाल में की थी। इसी कारण यह फिल्म लंबे समय से चर्चा और विवाद दोनों का विषय बनी हुई है।

सुखबीर बादल ने क्या कहा?
सतलुज फिल्म विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि फिल्म में दिखाए गए घटनाक्रम आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचने चाहिए। उनका कहना है कि इतिहास से जुड़े तथ्यों को लोगों तक पहुंचाना जरूरी है और इसी उद्देश्य से पार्टी इसे पूरे पंजाब में दिखाने की योजना बना रही है।

केंद्र सरकार पर भी उठे सवाल
सतलुज फिल्म विवाद के दौरान कुछ राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि फिल्म को OTT से हटाने के पीछे केंद्र सरकार की भूमिका हो सकती है। हालांकि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि बिना तथ्य के ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है और मामले को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।

रिव्यू कमेटी बनने की भी चर्चा
सतलुज फिल्म विवाद के बीच यह भी जानकारी सामने आई कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मामले की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी का इंतजार है। इस बीच पंजाब में कई संगठन फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
सतलुज फिल्म विवाद अब सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में नई बहस का कारण बन चुका है। एक ओर अकाली दल इसे लोगों तक पहुंचाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग राजनीतिक दल इस पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा चर्चा में रहने की संभावना है।

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