Ram Mandir Land Deal Controversy: अयोध्या से जुड़े राम मंदिर जमीन सौदा विवाद में नए दावे सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है। जांच से जुड़ी जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री के कुछ लेनदेन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
जमीन के सौदों को लेकर क्या है पूरा मामला?
राम मंदिर जमीन सौदा विवाद में दावा किया जा रहा है कि संबंधित जमीन वर्ष 2017 में लगभग दो करोड़ रुपये में खरीदी-बेची गई थी। इसके बाद 18 मार्च 2021 को इसी जमीन के अलग-अलग हिस्सों के दो अलग सौदे हुए। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर एक हिस्सा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को और दूसरा हिस्सा निजी खरीदारों को बेचे जाने की बात सामने आई है।रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि बाद में उसी जमीन के एक हिस्से का मूल्य पहले की तुलना में काफी अधिक हो गया और उसे ऊंची कीमत पर ट्रस्ट को बेचा गया। इन लेनदेन को लेकर अब जांच की जा रही है।
राम मंदिर जमीन सौदा विवाद में जांच के दौरान ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का नाम भी चर्चा में आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2021 में हुए जमीन खरीद-बिक्री के कुछ दस्तावेजों में अनिल मिश्रा कथित तौर पर गवाह के रूप में दर्ज हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की जांच जारी है और किसी भी प्रकार की आधिकारिक जिम्मेदारी अभी तय नहीं की गई है।
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एक ही दिन हुई दो डील, गवाह बने अनिल मिश्रा
राम मंदिर जमीन सौदा विवाद में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 18 मार्च 2021 को एक ही दिन संबंधित जमीन के दो अलग-अलग सौदे हुए। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन दोनों रजिस्ट्री में अनिल मिश्रा गवाह के रूप में मौजूद थे। बाद में इसी जमीन के एक हिस्से की ऊंची कीमत पर हुई बिक्री को लेकर भी उनके नाम का उल्लेख सामने आया है। इन्हीं तथ्यों की जांच की जा रही है।
जांच का केंद्र कृषि खसरा/मकान/गाटा संख्या 242/1, 242/2, 243, 244 और 246 की जमीन है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन खसरा नंबरों से जुड़ी करीब 2.334 हेक्टेयर कृषि भूमि वर्ष 2017 में लगभग 2 करोड़ रुपये में खरीदी-बेची गई थी। जांच से जुड़े दावों के अनुसार 18 मार्च 2021 को इसी जमीन को दो हिस्सों में विभाजित कर अलग-अलग सौदे किए गए। एक हिस्सा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लगभग 80 लाख रुपये में बेचा गया, जबकि दूसरा हिस्सा सुल्तान अंसारी और रवि तिवारी ने करीब 2 करोड़ रुपये में खरीदा।रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि करीब छह महीने बाद यही दूसरा हिस्सा 18.50 करोड़ रुपये में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बेचा गया। इसी मूल्य अंतर और खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को लेकर जांच एजेंसियां दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं।
निर्मोही अखाड़े के वकील ने भी उठाए सवाल
राम मंदिर जमीन सौदा विवाद को लेकर निर्मोही अखाड़े के काउंसलर तरुण लाल वर्मा ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में अनिल मिश्रा की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि एक ही जमीन के अलग-अलग सौदों में अनिल मिश्रा गवाह रहे। हालांकि, यह उनका सार्वजनिक बयान है और इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच पूरी होने का इंतजार
राम मंदिर जमीन सौदा विवाद में अनिल मिश्रा का नाम सामने आने के बाद भी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल मामले की जांच जारी है। अब तक किसी अदालत या जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ किसी आरोप को सिद्ध नहीं किया है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।