Tikamgarh Hospital: टीकमगढ़ जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर अवैध वसूली का आरोप! मासूम के परिजनों से ₹6000 लेने का वीडियो वायरल, डॉक्टर पर उठे सवाल

Anuj Nirala

Tikamgarh Hospital:जमील खान \टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिला अस्पताल में एक बार फिर इलाज के नाम पर कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक मासूम बच्चे के इलाज के दौरान उसके परिजनों से 6 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। इस पूरे मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह पर आरोप लगाए गए हैं, हालांकि डॉक्टर ने सभी आरोपों से इनकार किया है। फिलहाल इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

‘इंस्ट्रूमेंट मंगाने’ के नाम पर लिए गए 6 हजार रुपये

पीड़ित परिवार के सदस्य आजाद यादव, निवासी मालपीथा, का आरोप है कि उनका मासूम बच्चा जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती था। इलाज के दौरान डॉ. अरविंद सिंह ने कथित तौर पर झांसी से विशेष इंस्ट्रूमेंट मंगवाने की बात कहकर 6 हजार रुपये नकद मांगे।परिजनों का आरोप है कि यह राशि अस्पताल परिसर के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर के पीछे संचालित कथित निजी क्लीनिक में मौजूद कंपाउंडर को दी गई।

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वायरल वीडियो में कंपाउंडर का दावा

Tikamgarh Hospital: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कथित रूप से कंपाउंडर कृष्णकांत राजपूत, निवासी नारगुड़ा, पैसे लेने की बात स्वीकार करता दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह यह भी दावा करता है कि वह डॉ. अरविंद सिंह के निजी क्लीनिक में बैठता है और डॉक्टर सरकारी ड्यूटी के अलावा सुबह, दोपहर और शाम को वहां मरीज भी देखते हैं।हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

डॉक्टर ने आरोपों को बताया निराधार

मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका कोई निजी अस्पताल या क्लीनिक नहीं है और वे केवल जिला अस्पताल में अपनी सरकारी ड्यूटी निभाते हैं।डॉक्टर ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कराई जा सकती है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

Tikamgarh Hospital: घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर मरीजों से पैसे वसूले जा रहे हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

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सिविल सर्जन ने कार्रवाई के दिए संकेत

मामले को लेकर जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर द्वारा इलाज के नाम पर पैसे लिए गए हैं या ड्यूटी के दौरान मरीजों को बाजार से दवाएं लिखी जा रही हैं, तो सिविल सर्जन के माध्यम से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।

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