Friday, August 21, 2026
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CG NEWS: सनसनीखेज खुलासा : लैलूंगा में ‘मौत’ बांट रहे अवैध पैथोलॉजी और लैब? RTI की फाइलों ने स्वास्थ्य विभाग की खोली पोल!…

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CG NEWS: गौरी शंकर गुप्ता /​रायगढ़ : क्या जिले का लैलूंगा क्षेत्र अवैध क्लीनिकों और लैब का चारागाह बन चुका है? क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फाइलों में ‘सब चंगा सी’ का खेल खेलकर मासूम मरीजों की जान जोखिम में डाल रहे हैं? सूचना के अधिकार (RTI) से निकले दस्तावेजों ने जो हकीकत बयां की है, वह न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की ईमानदारी पर भी गहरा सवालिया निशान लगाती है।

CG NEWS: कागजों में ‘सेटिंग’ या जनता की सेहत से खिलवाड़? -​RTI के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लैलूंगा से प्राप्त दस्तावेजों ने भ्रष्टाचार और लापरवाही की परतें उधेड़ दी हैं। कई संस्थानों के दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पाई गई हैं।

CG NEWS: ​खबर की मुख्य कड़ियां :

* ​एक्सपायरी लाइसेंस का खेल: कई संस्थानों के लाइसेंस या तो खत्म हो चुके हैं या उनकी वैधता संदिग्ध है। बिना रिन्यूअल के ये लैब धड़ल्ले से रिपोर्ट बांट रहे हैं।
* ​डिग्रियों पर संदेह: लैब टेक्नीशियनों के डिप्लोमा और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की सत्यता जांच के घेरे में है। कई सर्टिफिकेट्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
* ​नाम और पते का रहस्य: एक ही संस्थान के अलग-अलग दस्तावेजों में अलग-अलग पते और संचालन अवधियां दर्ज हैं, जो ‘कागजी हेरफेर’ की ओर सीधा इशारा करती हैं।

​⚠️ गलत रिपोर्ट = जानलेवा इलाज!…​विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पैथोलॉजी लैब के मानक सही नहीं हैं और तकनीशियन अयोग्य हैं, तो रिपोर्ट गलत आने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है।
​”गलत रिपोर्ट के आधार पर होने वाला इलाज मरीज के लिए जहर के समान है। लैलूंगा में चल रहा यह ‘बिना मानक का कारोबार’ किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहा है।”

CG NEWS: तीखे सवाल: जवाब कौन देगा? –

* ​फील्ड वेरिफिकेशन क्यों नहीं? क्या विभाग के अधिकारियों ने कभी अपनी एसी कुर्सी से उठकर इन लैब की जमीनी हकीकत देखी?
* ​मिलीभगत या लापरवाही? दस्तावेजों में इतनी स्पष्ट खामियां होने के बावजूद इन केंद्रों को संचालन की अनुमति कैसे मिली?
* ​मरीजों की जान की कीमत क्या? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

CG NEWS: अब उठ रही है कार्रवाई की मांग

​इस खुलासे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:

* ​कलेक्टर और सीएमएचओ (CMHO) स्तर पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित हो।
* ​संदिग्ध लैब और क्लीनिकों का तत्काल फील्ड वेरिफिकेशन कर उन्हें सील किया जाए।
* ​उन अधिकारियों की पहचान हो जिन्होंने फाइलों में कमियां होने के बावजूद ‘हरी झंडी’ दी।

CG NEWS: ​लैलूंगा का यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक साजिश जैसा प्रतीत होता है। अगर वक्त रहते इन ‘अवैध दुकानों’ पर ताला नहीं जड़ा गया, तो स्वास्थ्य विभाग की यह चुप्पी किसी गरीब परिवार के चिराग को बुझा सकती है।

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