Wednesday, August 19, 2026
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CG High Court Verdict: शिक्षकों की प्रशासनिक पदों पर प्रभार नियुक्तियों पर हाईकोर्ट की रोक: जस्टिस बीडी गुरु का बड़ा फैसला….

Chhattisgarh High Court
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CG High Court Verdict: बिलासपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत शैक्षणिक अमले को गैर-शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों पर प्रभार सौंपने की परिपाटी पर एक अत्यंत कड़ा और ऐतिहासिक विधिक फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने साफ कर दिया है कि टीचिंग कैडर (शिक्षण संवर्ग) के किसी भी शिक्षक या व्याख्याता को सीधे तौर पर प्रशासनिक कैडर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद का विधिक प्रभार नहीं सौंपा जा सकता। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा करना ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ (RTE Act) की धारा 27 और विभागीय सेवा नियमों का खुला उल्लंघन है।

सूरजपुर के प्रतापपुर बीईओ का आदेश अवैध ठहराकर रद्द

यह पूरा विधिक मामला सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता मुन्नू सिंह धुर्वे वर्ष 2015 से सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) के मूल प्रशासनिक पद पर कार्यरत हैं। जून 2021 में विभाग ने उनकी प्रशासनिक योग्यता के आधार पर उन्हें प्रतापपुर का प्रभारी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) नियुक्त किया था। लेकिन 10 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने एक विवादित विधिक आदेश जारी कर मुन्नू सिंह से प्रभार छीन लिया और उनकी जगह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बासदेई में पदस्थ अंग्रेजी के व्याख्याता (टीचिंग कैडर) अरुण कुमार पांडेय को प्रभारी बीईओ बना दिया। विभाग के इस विसंगतिपूर्ण आदेश को मुन्नू सिंह ने अधिवक्ता वी.आर. तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में विधिक चुनौती दी थी।

‘E कैडर’ बनाम ‘T कैडर’ का विवाद यहां लागू नहीं

प्रतिवादी व्याख्याता अरुण कुमार पांडेय की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी थी कि प्रतापपुर क्षेत्र ‘शेड्यूल्ड एरिया’ (अनुसूचित क्षेत्र) के अंतर्गत आता है, जहाँ केवल ‘T कैडर’ (Tribal Cadre) के अधिकारी ही पदस्थ हो सकते हैं। चूंकि याचिकाकर्ता ‘E कैडर’ (Education Cadre) से हैं, इसलिए वे इस पद पर रहने का विधिक अधिकार नहीं रखते।

जस्टिस बीडी गुरु ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यहाँ मुख्य विधिक विवाद ‘E कैडर’ बनाम ‘T कैडर’ का है ही नहीं। मुख्य वैधानिक सवाल यह है कि क्या टीचिंग कैडर के व्यक्ति को प्रशासनिक पद सौंपा जा सकता है? कानूनन दोनों कैडर के कार्यक्षेत्र और अनुभव बिल्कुल अलग हैं।

फीडर चैनल से बाहर होने के कारण नियुक्ति अवैध

उच्च न्यायालय ने ‘छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम, 2026’ का विधिक हवाला देते हुए कहा कि बीईओ का पद 75% एबीईओ की पदोन्नति से और 25% हाई स्कूल के प्राचार्यों के विधिक माध्यम से भरा जाता है। चूंकि अरुण कुमार पांडेय केवल एक व्याख्याता हैं, इसलिए वे तय फीडर चैनल (योग्यता श्रेणी) से पूरी तरह बाहर हैं।

अदालत ने आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि RTE एक्ट की धारा 27 साफ तौर पर अनिवार्य करती है कि शिक्षण संवर्ग के कर्मचारियों को आपात स्थितियों (जैसे चुनाव या जनगणना) को छोड़कर किसी भी गैर-शैक्षणिक कार्य में न लगाया जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार के 10 जून 2026 के आदेश को पूरी तरह से मनमाना और कानून के विपरीत मानते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है और मुन्नू सिंह धुर्वे की याचिका स्वीकार कर ली है।

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