Wednesday, August 19, 2026
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Ram Mandir Donation Scam:अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का सनसनीखेज पर्दाफाश: सिंडिकेट के ध्वस्त होते ही रोज का चंदा ₹18 लाख से बढ़कर हुआ ₹26 लाख, एसआईटी को मिले अकाट्य सबूत

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित ऐतिहासिक और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र श्री राम जन्मभूमि मंदिर के काउंटिंग रूम (दस्तावेज कक्ष) और दानपात्रों से चढ़ावे की राशि गायब होने के मुकदमे में जांच एजेंसियों को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की संयुक्त टीमों द्वारा शुरू की गई सघन पड़ताल में यह विधिक रूप से साफ हो गया है कि मंदिर के भीतर एक बेहद शातिर आपराधिक नेटवर्क सक्रिय था। यह सिंडिकेट हर दिन औसतन 6 से 8 लाख रुपये की चढ़ावा राशि पर बड़ी सफाई से हाथ साफ कर रहा था। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद एसआईटी के हाथ बेहद पुख्ता वित्तीय साक्ष्य लगे हैं।

बैंक की तुलनात्मक रिपोर्ट ने बयां की पूरी कहानी

इस पूरे हाई-प्रोफाइल घोटाले को उजागर करने में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की तरफ से एसआईटी को सौंपी गई दैनिक चंदे की तुलनात्मक रिपोर्ट ने मुख्य भूमिका निभाई है। बैंककर्मियों द्वारा सौंपे गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब तक यह चोरी का सिंडिकेट सक्रिय था, तब तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों में प्रतिदिन औसतन केवल 16 से 18 लाख रुपये ही दान के रूप में जमा हो पा रहे थे। लेकिन जैसे ही पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा, वैसे ही मंदिर में प्रतिदिन जमा होने वाली यह राशि अचानक उछलकर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई। दान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या समान होने के बावजूद रोजाना के कुल चंदे में आए इस 6 से 8 लाख रुपये के भारी अंतर ने आंतरिक सुरक्षा और प्रबंधन की कमियों को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

बैंक अधिकारियों से तीखे सवाल, पुराने खातों का होगा री-ऑडिट

साक्ष्यों के इस ताने-बाने को और मजबूत करने के लिए एसआईटी ने शुक्रवार को चढ़ावे की नकदी गिनने की प्रक्रिया में शामिल बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और नोट गिनने वाले कर्मियों को तलब किया था। जांच दल ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि ट्रस्ट और बैंक के बीच तय हुए कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन क्यों नहीं किया गया? निर्धारित गणना प्रक्रिया में किसके आदेश पर गुपचुप बदलाव किए गए थे? एसआईटी ने यह भी सवाल दागा कि यदि बैंक को किसी भी स्तर पर इस वित्तीय अनियमितता का संदेह था, तो इसकी लिखित सूचना समय रहते उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं दी गई?

स्वतंत्र एजेंसी से दोबारा जांच कराने की तैयारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी अब किसी भी ढिलाई के मूड में नहीं है। खातों में छिपे अन्य संभावित विरोधाभासों और अतीत में हुई गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए जांच दल राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पुरानी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट का किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से दोबारा ‘री-ऑडिट’ कराने की विधिक संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है, ताकि मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं के समर्पण के साथ खिलवाड़ करने वाले हर एक चेहरे को बेनकाब किया जा सके।

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