गौरीशंकर गुप्ता | बिलासपुर : जिला न्यायालय बिलासपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा दावा प्रस्तुत करने के मामले में चार अधिवक्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया।
CG NEWS: प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला दशम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि अधिवक्ता एन.पी. चंद्रवंशी, भगवती कश्यप, शुभम चंद्रवंशी और सूरज कुमार ने मृतक प्रभात कुजुर के नाम पर मोटर यान अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजा प्राप्त करने के लिए फर्जी दावा प्रस्तुत किया।
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CG NEWS: जांच के दौरान यह सामने आया कि एक महिला को मृतक की पत्नी बताकर न्यायालय में पेश किया गया, जबकि बाद में वास्तविक स्थिति कुछ और निकली। न्यायालय में उपस्थित एक महिला ने स्वयं को प्रभात कुजुर की पत्नी होने से इनकार करते हुए बताया कि वह जोनी कुजुर की पत्नी है और उसने किसी भी अधिवक्ता को अधिकृत नहीं किया है।
CG NEWS: मामले में आरोप है कि एक अज्ञात महिला को फर्जी रूप से मृतक की पत्नी बनाकर शपथ आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया गया और उसके आधार पर दावा तैयार किया गया।
CG NEWS: इस संबंध में थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 502/2026 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान जालसाजी से संबंधित गंभीर धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
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CG NEWS: विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) लवकेश प्रताप सिंह बघेल ने सुनवाई के दौरान कहा कि अधिवक्ता होने के नाते आरोपियों को विधि की जानकारी होती है, ऐसे में अनभिज्ञता का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने आरोपों को गंभीर मानते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
CG NEWS: फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।









