Bhaiyathan District Panchayat : सूरजपुर में मचा हड़कंप, नरेगा घोटाले में सचिव को निशाना बनाने का आरोप, बड़े अफसरों पर कार्रवाई शून्य

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Bhaiyathan District Panchayat : गौरी शंकर गुप्ता/सूरजपुर। जिले के भैयाथान जनपद पंचायत में सात साल पुरानी नरेगा (महात्मा गांधी नरेगा) की फाइलों ने एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। विभाग द्वारा ग्राम बरौधी के तत्कालीन सचिव संजय गुप्ता को ₹1,11,900 की वसूली के लिए तीन अलग-अलग तारीखों में, तीन भिन्न क्रमांकों के साथ नोटिस जारी करने से पूरे प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।

तारीख और क्रमांक अलग, लेकिन निशाना एक

जनपद कार्यालय से जारी किए गए ये तीनों नोटिस— 15 अक्टूबर, 31 अक्टूबर और 6 नवंबर 2025 की तारीखों के हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों आदेशों में वसूली की राशि वही है $(\text{₹1,11,900})$, आरोप वही हैं (नरेगा वर्ष 2017-18 के सामाजिक अंकेक्षण में फर्जी उपस्थिति भरकर भुगतान), और निशाना भी वही— तत्कालीन सचिव संजय गुप्ता। जनता और पीड़ित पक्ष सवाल उठा रहा है कि यह प्रशासनिक कार्रवाई है, या फिर दबाव बनाने की सुनियोजित रणनीति? सात साल तक धूल खाती फाइलों का अब अचानक एक साथ ‘जागना’ विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह पैदा करता है।

Bhaiyathan District Panchayat :

वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा सवाल

यदि नरेगा वर्ष 2017-18 में घोटाला हुआ था, तो सात साल तक विभाग क्या कर रहा था? नरेगा कार्य प्रक्रिया में उपयंत्री, कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक, एस.डी.ओ., और जनपद सीईओ जैसे कई वरिष्ठ अधिकारियों की मुहर के बिना एक भी रुपया जारी नहीं हो सकता। यह भुगतान उन्हीं अधिकारियों की परतों से होकर स्वीकृत हुआ था, लेकिन सात साल तक किसी भी अफसर को गड़बड़ी क्यों नहीं दिखी?

  • बड़ा सवाल: माप पुस्तिका किसने भरी, सत्यापन किसने किया, और भुगतान को किसने पास किया?

  • हैरानी: तीनों नोटिसों में किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने या उन पर कार्रवाई का कोई जिक्र नहीं है।

तीन आदेश— दबाव का संकेत, सचिव ‘बलि का बकरा’?

एक ही मामले में तीन आदेश जारी होना, विभाग की घोर लापरवाही या सुनियोजित दबाव को दर्शाता है। क्या विभाग पहले आदेश को गलत मान रहा था, दूसरा आदेश केवल दबाव के लिए था, या तीसरा आदेश किसी अदृश्य हाथ की देन है?

तीनों पत्रों में वसूली न करने पर सचिव को “आप स्वयं जिम्मेदार होंगे” लिखकर छोड़ दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति स्पष्ट रूप से यह संकेत देती है कि विभाग कमजोर कर्मचारी (सचिव) को बलि का बकरा बनाकर ऊपर की परतों में छिपे असली जिम्मेदारों को बचा रहा है। तीनों आदेशों में सामाजिक अंकेक्षण टीम ने किस अधिकारी की गलती पाई, इसका भी कोई उल्लेख नहीं है, जिससे पूरी जांच की निष्पक्षता संदिग्ध दिखाई देती है।

Bhaiyathan District Panchayat :

जनता की मांग: हर स्तर के अधिकारी पर हो कार्रवाई

स्थानीय जनता और प्रशासनिक विशेषज्ञ एक स्वर में पूछ रहे हैं कि क्या विभाग के लिए ‘जिम्मेदारी’ सिर्फ निचले कर्मचारियों के लिए ही आरक्षित है? यह वसूली तब तक न्याय नहीं कहलाएगी, जब तक जांच में हर स्तर के अधिकारी को शामिल नहीं किया जाता। जनता ने मांग की है कि उच्चाधिकारी इस मामले में तुरंत संज्ञान लें, तीन आदेशों की विसंगति की जांच कराएं, और उन बड़े अफसरों की जिम्मेदारी तय करें जिनकी लापरवाही से यह फाइलें सात साल तक दबी रहीं। अन्यथा, यह कार्रवाई सिर्फ “बड़ी मछलियों को बचाकर छोटी कड़ियों पर हथौड़ा” चलाने की परंपरा बन जाएगी।

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