Aravalli mountain range : अरावली पर ‘डेथ वारंट’ : 100 मीटर के फॉर्मूले ने खनन माफियाओं के लिए खोले रास्ते, गायब हो रहे पहाड़

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Aravalli mountain range : भिवाड़ी/नई दिल्ली: दुनिया की सबसे पुरानी पर्वतमाला अरावली अब केवल कागजों पर सिमटने की कगार पर है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में स्वीकार किए गए ‘रिचर्ड बर्फी’ के लैंडफॉर्म सिद्धांत ने अरावली के संरक्षण की पूरी परिभाषा ही बदल दी है। इस नए नियम के तहत अब केवल वही पहाड़ ‘अरावली’ माने जाएंगे जिनकी ऊंचाई आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक है। विशेषज्ञों का दावा है कि इस एक फैसले से अरावली का लगभग 90% हिस्सा कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर हो गया है, जिसका सीधा फायदा खनन माफिया उठा रहे हैं।

एनसीआर के औद्योगिक शहर भिवाड़ी से सटे कैरानी इलाके की स्थिति भयावह है। यहाँ अरावली की वे पहाड़ियां जो कभी 200 से 300 फीट ऊंची हुआ करती थीं, अब लगभग समतल हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन माफिया 60-70 मीटर ऊंची पहाड़ियों को अरावली के दायरे से बाहर बताकर लीज हासिल कर लेते हैं और फिर ‘पहाड़ी’ के नामोनिशान मिटने तक खुदाई जारी रखते हैं। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) की रिपोर्ट भी इस क्षेत्र में पहाड़ियों के गायब होने की पुष्टि करती है।

प्रशासनिक स्तर पर हालात और भी जटिल हैं। 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, लेकिन 2008 में राजस्थान सरकार ने इसी 100 मीटर के सिद्धांत का सहारा लेकर कई लीज जारी कर दीं। ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि वन विभाग और माइनिंग विभाग की कथित मिलीभगत से कई खदानों में 500 मीटर तक गहरी खुदाई कर दी गई है। पहाड़ियों के ठीक बगल में लगे विशाल क्रेशर प्लांट दिन-रात अरावली के अस्तित्व को धूल में मिला रहे हैं।

पर्यावरणविदों की चेतावनी है कि अगर अरावली को केवल ऊंचाई के पैमाने पर मापा गया, तो दिल्ली-एनसीआर के लिए यह ‘डेथ वारंट’ साबित होगा। अरावली न केवल थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकती है, बल्कि यह क्षेत्र के लिए ‘वॉटर रिचार्ज’ का सबसे बड़ा स्रोत भी है। 100 मीटर से कम की पहाड़ियों को सुरक्षा से बाहर करने का मतलब है उन पारिस्थितिक गलियारों (wildlife corridors) को नष्ट करना जहाँ तेंदुए और अन्य वन्यजीव रहते हैं।

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VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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