Oraon Tribe Festival Chhattisgarh : बलरामपुर (छत्तीसगढ़)। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े आदिवासी समूह, उरांव जनजाति के प्रमुख महापर्व ‘खद्दी परब’ (धरती पूजा/सरहुल) के आयोजन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। आदिवासियों की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था ‘राजी पड़हा, भारत’ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा यानी 02 अप्रैल 2026 को यह प्रकृति उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
प्रकृति पूजा का महाकुंभ: क्या है ‘खद्दी परब’?
संगठन के राजी देवान विनोद भगत ने बताया कि उरांव समाज पूर्णतः प्रकृति पूजक है। समाज की संस्कृति में दो पर्वों का विशेष महत्व है:
- करम परब: कुंवार पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- खद्दी परब (धरती पूजा): चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है।
शासकीय मान्यता और सार्वजनिक अवकाश
छत्तीसगढ़ शासन ने आदिवासी संस्कृति और ‘धरती पूजा’ के महत्व को स्वीकार करते हुए इस दिन को सार्वजनिक अवकाश के रूप में मान्यता दी है। राजपत्र में प्रकाशित यह अवकाश समाज की पहचान और गौरव को रेखांकित करता है।
पांच राज्यों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
इस भव्य आयोजन की तैयारियों के लिए ‘राजी पड़हा’ की राष्ट्रीय टीम सक्रिय है। बलरामपुर मुख्यालय ‘नई रोहतासगढ़ वीर भूमि सरना शक्ति पाठ’ (परसापानी) में होने वाले इस उत्सव में छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, असम, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल के उरांव प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।
तैयारियों का नेतृत्व संगठन के मुख्य पदाधिकारी कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- राजी बेल: एडवोकेट बागी लकड़ा
- राजी देवान: विनोद भगत
- राजी कोटवार: कैप्टन लोहरा उरांव
संपर्क सूत्र
आयोजन के संबंध में अधिक जानकारी के लिए संगठन के मुख्यालय परसापानी (बलरामपुर) अथवा आधिकारिक ईमेल rajipadhabharat@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। उरांव समाज ने समस्त भारतवासियों से इस पावन प्रकृति उत्सव में सहभागी बनने की अपील की है।










