Kanadia Land Dispute : इंदौर। बायपास स्थित फोनिक्स सिटाडल मॉल के पीछे की 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बेशकीमती जमीन (खसरा क्रमांक 44) को लेकर चल रहे कानूनी संग्राम में एक बड़ा मोड़ आया है। इस मामले में कथित भू-माफियाओं को तब बड़ा झटका लगा जब उनके अपने ही वकीलों ने केस से दूरी बना ली। अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी भी प्रकार की साजिश या न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का हिस्सा नहीं बन सकते।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह तीन हेक्टेयर से अधिक भूमि पिछले कई दशकों से विवादों के घेरे में है। प्रारंभ में पार्वती बाई के कथित वारिसों द्वारा इस पर दावा किया गया था, जिसे तहसीलदार ने खारिज कर दिया था। राजस्व न्यायालय से राहत न मिलने पर भू-माफियाओं ने सिविल कोर्ट का सहारा लिया और वहां कथित समझौतों के आधार पर डिग्रियां हासिल कर लीं। अब इसी प्रकार का प्रयास मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित द्वितीय अपील के दौरान करने की कोशिश की गई।
मामले में मोड़ तब आया जब पिछली सुनवाई में समझौता पेश करने के बजाय, एक पक्ष ने अचानक मुकदमा वापस लेने का आवेदन लगा दिया। इस संदिग्ध कदम को देखते हुए उनके अधिवक्ताओं ने खुद को प्रकरण से अलग कर लिया। दूसरी ओर, इस विवाद के बीच एक नए पक्ष ने कलेक्टर को आवेदन देकर इस भूमि को अपने ट्रस्ट के नाम आवंटित करने की मांग की है, जबकि एक जनहित याचिका में इस जमीन को ‘लावारिस’ मानकर सरकारी संपत्ति घोषित करने की अपील की गई है।
माननीय उच्च न्यायालय ने इस पूरे घटनाक्रम और भूमि के स्वामित्व की स्थिति को गंभीरता से लिया है। अदालत ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है। अब पूरी जांच और सरकार के जवाब पर टिका है कि यह बेशकीमती जमीन सरकारी खजाने में जाएगी या फिर भू-माफियाओं के किसी नए जाल में उलझेगी।











