जबलपुर – इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने मंगलवार को इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्पीकर ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया है।
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जस्टिस यशवंत वर्मा उस समय दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस थे, जब 14 मार्च को उनके लुटियंस स्थित बंगले में आग लग गई थी। इस घटना के बाद, 21 मार्च को कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि उनके घर से 15 करोड़ रुपये नकद मिले, जिसमें से कई नोट जल गए थे। इस घटना के वीडियो भी सामने आए, जिनमें 500-500 रुपये के जले हुए नोटों के बंडल बोरों में भरे हुए दिखे। घटना के समय जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे। बाद में उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया गया था।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए, 22 मार्च को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने आरोपों की आंतरिक जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इस पैनल ने 4 मई को अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया। इस रिपोर्ट के आधार पर, पूर्व सीजेआई खन्ना ने 8 मई को सरकार से जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश की थी।
लोकसभा में महाभियोग की प्रक्रिया
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने बताया कि उन्हें रविशंकर प्रसाद और विपक्ष के नेता समेत कुल 146 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव मिला है, जिसमें जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव पर भाजपा, कांग्रेस, टीडीपी, जदयू और सीपीएम सहित कई दलों के 215 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर करने वालों में राहुल गांधी, अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद और सुप्रिया सुले जैसे प्रमुख सांसद भी शामिल हैं।
यह आजाद भारत में पहली बार है कि किसी हाई कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग लाया गया है।
जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का गठन
लोकसभा स्पीकर ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार, कर्नाटक हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट बीबी आचार्य, और मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव शामिल हैं। जांच समिति की रिपोर्ट आने तक महाभियोग प्रस्ताव लंबित रहेगा।











